कोलकाता : दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर की 56 वर्षीय एक महिला को एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल हृदय रोग से सफलतापूर्वक निजात दिलाई गई। महिला कोरोनरी आर्टरी फिस्टुला से ग्रसित थी, जो सामान्य आबादी के केवल लगभग 0.02 प्रतिशत लोगों में पाई जाती है। मणिपाल अस्पताल, ढाकुरिया में डॉक्टरों की टीम ने ढाई घंटे की सर्जरी कर मरीज को नया जीवन दिया। ऑपरेशन का नेतृत्व वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. कौशिक मुखर्जी ने किया। मरीज को पिछले कुछ समय से घर के सामान्य कामकाज के दौरान सांस फूलना, अचानक धड़कन तेज होना और सीने में दर्द की शिकायत हो रही थी। ईसीजी और इको डॉप्लर जांच में बीमारी का स्पष्ट पता नहीं चल पाया।
बाद में की गई सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी और विशेष एंजियोग्राम जांच में हृदय की दो असामान्य फिस्टुला का पता चला। एक फिस्टुला हृदय की लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी से निकलकर मुख्य पल्मोनरी आर्टरी से जुड़ रही थी, जबकि दूसरी एक छोटी शाखा राइट कोरोनरी आर्टरी से निकलकर उसी पल्मोनरी आर्टरी में मिल रही थी। इन असामान्य कनेक्शनों के कारण रक्त का प्रवाह सामान्य रूप से नहीं हो पा रहा था, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था और उसकी पंपिंग क्षमता प्रभावित हो रही थी।
डॉ. कौशिक मुखर्जी ने बताया, 'मरीज अपने इकलौते बेटे के साथ अस्पताल आई थीं और दोनों बेहद चिंतित थे। हमारी टीम ने उन्हें पूरी जानकारी देकर आश्वस्त किया और तुरंत सर्जरी का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान हमने मरीज के अपने पेरिकार्डियम से तैयार एक छोटे पैच की मदद से असामान्य कनेक्शन को बंद किया। साथ ही दाहिनी कोरोनरी आर्टरी की छोटी शाखा को सुरक्षित रूप से बांधकर अनावश्यक रक्त प्रवाह रोक दिया गया।'
सर्जरी के बाद मरीज को उसी दिन वेंटिलेशन से हटा दिया गया। उनकी रिकवरी पूरी तरह सामान्य रही और चार दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के अनुसार अब वह सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकेंगी तथा भविष्य में हृदय संबंधी अतिरिक्त जोखिम की संभावना नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोनरी आर्टरी फिस्टुला के लगभग 50 प्रतिशत मरीजों में वयस्क अवस्था में लक्षण उभरते हैं। समय पर पहचान और उपचार न होने पर यह स्थिति ‘कोरोनरी स्टील सिंड्रोम’ का कारण बन सकती है, जिससे सांस फूलना, सीने में दर्द, अस्थिर एनजाइना और दुर्लभ मामलों में हार्ट अटैक तक का खतरा रहता है।