मधुर, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : एमएस ऑर्थोपेडिक्स की पढ़ाई शुरू करने से पहले कराई गई नियमित स्वास्थ्य जांच ने 29 वर्षीय एक मेडिकल ग्रेजुएट की जिंदगी में बड़ा मोड़ ला दिया। जांच के दौरान बिना किसी लक्षण के उसकी किडनी में करीब 5 सेंटीमीटर का ट्यूमर पाया गया। आगे की जांच में ट्यूमर के रेनल सेल कार्सिनोमा (किडनी कैंसर) होने की पुष्टि हुई। ट्यूमर किडनी के बेहद जटिल हिस्से में, बड़ी रक्त वाहिकाओं के पास स्थित था। फोर्टिस अस्पताल, कोलकाता के डॉक्टरों ने रोबोटिक सर्जरी के जरिए ट्यूमर को पूरी तरह निकालकर मरीज की किडनी को सुरक्षित रखने में सफलता हासिल की।
मरीज को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी। एमएस में दाखिले से पहले कराए गए प्री-एडमिशन मेडिकल चेकअप के दौरान पेट के अल्ट्रासाउंड में संयोग से किडनी में गांठ दिखाई दी। इसके बाद की गई जांच में कैंसर की पुष्टि हुई। करीब 5 सेंटीमीटर का यह ट्यूमर किडनी के अंदर गहराई में रेनल हिलम के पास था। यह किडनी का वह संवेदनशील हिस्सा है, जहां बड़ी रक्त वाहिकाएं और पेशाब से जुड़ी महत्वपूर्ण संरचनाएं मौजूद होती हैं।
पूरी किडनी निकालने की बजाय ट्यूमर हटाया
ट्यूमर की जटिल स्थिति के कारण सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। ऐसे मामलों में कई बार ट्यूमर को पूरी तरह निकालने के लिए पूरी किडनी हटाने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, मरीज की कम उम्र और भविष्य में किडनी की कार्यक्षमता बनाए रखने को प्राथमिकता देते हुए फोर्टिस अस्पताल के यूरोलॉजी, रोबोटिक यूरोलॉजी, यूरो-ऑन्कोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांटेशन के निदेशक डॉ. श्रीनिवास नारायण के नेतृत्व में टीम ने रोबोटिक पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी करने का निर्णय लिया।
पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी में पूरी किडनी निकालने के बजाय सिर्फ कैंसरयुक्त ट्यूमर को हटाया जाता है और किडनी के स्वस्थ हिस्से को बचाया जाता है।
ICG इमेजिंग से मिली सटीकता
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने इंडोसायनिन ग्रीन (ICG) इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे ट्यूमर और स्वस्थ किडनी के ऊतकों के बीच अंतर करने में मदद मिली। फोर्टिस अस्पताल में उपलब्ध दा विंची रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम की मदद से डॉक्टरों ने किडनी के अंदर के जटिल हिस्से को बेहतर तरीके से देखा और महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं के आसपास बेहद सटीकता से सर्जरी की।
सर्जरी की विस्तृत योजना और रोबोटिक यूरो-ऑन्कोलॉजी में टीम के अनुभव के आधार पर ट्यूमर को आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं से सावधानीपूर्वक अलग किया गया। ट्यूमर को पूरी तरह निकाल दिया गया और स्वस्थ किडनी के अधिकतम हिस्से को सुरक्षित रखा गया।
दूसरे दिन ही मिली अस्पताल से छुट्टी
सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी तेजी से हुई और ऑपरेशन के दूसरे दिन ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बाद में हुई पैथोलॉजी जांच में पुष्टि हुई कि कैंसरयुक्त ट्यूमर पूरी तरह निकाल दिया गया है और ट्यूमर के आसपास कोई कैंसरयुक्त हिस्सा नहीं बचा है। मरीज अब सामान्य जीवन और रोजमर्रा की गतिविधियों में लौट चुका है तथा जल्द ही अपनी पोस्टग्रेजुएट ऑर्थोपेडिक्स की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
कम उम्र में भी सामने आ रहे बिना लक्षण वाले मामले
डॉ. श्रीनिवास नारायण ने कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान किडनी में ट्यूमर का अचानक पता चलने के मामले अब देखने को मिल रहे हैं। इनमें 20 और 30 वर्ष की उम्र के ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनमें किसी तरह के लक्षण नहीं होते।
उन्होंने कहा कि किडनी कैंसर शुरुआती चरण में अक्सर बिना लक्षण के रहता है। पेशाब में खून आना, भले ही एक बार ही क्यों न दिखाई दे, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय जांच और नियमित हेल्थ चेकअप से ऐसे ट्यूमर का शुरुआती चरण में पता लगाने में मदद मिल सकती है। शुरुआती पहचान होने पर कई मामलों में कैंसर का इलाज करते हुए किडनी को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।