जीवन की सार्थकता जीवन की सार्थकता
धर्म/राशिफल

जीवन की सार्थकता

चिंतन

देशकाल, समय तथा परिस्थितियों के अनुसार ही मनुष्य को अपने जीवन को ढालने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य अपने को सुखी बना सकता है एवं आनन्द का अनुभव कर सकता है।

साथ ही जीवन की सार्थकता सिद्ध कर सकता है। सामान्य परिस्थितियों में नदी की लहरों के विपरीत बहना भी मनुष्य की कोई बुद्धिमत्ता नहीं कही जा सकती। ऐसा करने से डूबने की संभावनाएं ही होंगी।

विषम परिस्थितियों में तो ऐसा करना उचित भी कहा जा सकता है। उदाहरण स्वरूप हम नदी को नाव में बैठकर पार कर रहे हैं तथा यकायक दुर्घटना हो जाती है तब ऐसी परिस्थिति में नदी को किसी भी तरह पार करने में ही बुद्धिमत्ता कही जा सकती है। बिरले ही मनुष्य होते हैं जो विषम परिस्थितियों में नदी की विपरीत धाराओं को तैरकर पार करते हैं, अर्थात संघर्ष कर नया मार्ग बना लेते हैं। उसके लिए आवश्यक हैं- मनोबल, आत्मविश्वास, शक्ति व धैर्य।

होता यह है कि मनुष्य समय व परिस्थितियों को न समझकर शीघ्र ही अपना धैर्य और विवेक खो

बैठता है तथा ऐसा कदम उठा लेता है, जो स्वयं के लिए ही विनाशकारी था। एक व्यक्ति जो बैंक में कार्यरत था, उसे कोरोना पाजिटिव आया। जब उसने सुना तो वह इतना भयभीत हो गया कि अपना धैर्य व विवेक खो बैठा, उसने आत्महत्या करने को तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी और तनिक ही देर में शारीरिक रूप से मजबूत  हँसता-खेलता शरीर दुनिया से विदा हो गया।

वो ही क्या कितने ही लोग ऐसे प्राणघातक कदम उठा लेते हैं। विश्व में हजारों लोग ऐसे भी उदाहरण स्वरूप मिले जो उम्रदराज होते हुए भी कोरोना जैसे शत्रु से हारे नहीं और स्वस्थ होकर अपने घर वापस लौट आए और सामान्य जीवन जीकर खुश हैं। इसी तरह कितने ही किशोर, युवा-युवतियां, नवविवाहिताएँ आदि छोटी- छोटी बातों पर ही ऐसे प्राणघातक कदम उठा बैठते हैं। आखिर क्यों ?

तनिक सोचा है कभी ?

मनुष्य ने अनमोल जीवन पाया है। ऐसा घातक कदम उठाने से पहले एक बार विकल्प अवश्य सोचना कि यदि हम समय व परिस्थितियों के अनुसार नहीं ढल पा रहे हैं तो थोड़ा ठहर जाना, शांत मन से रास्ता खोजना क्योंकि दुनिया उतनी ही बड़ी नहीं है जितना कि हमने समझ ली है। उससे आगे भी बहुत कुछ है। यदि कोई रास्ता न मिले तो एक बार नदी की विपरीत धारा के बीच संघर्ष कर धैर्य, विवेक, साहस से  तैर जाना, नया जीवन बनाना, यही जीवन को श्रेष्ठतम बनाने की सार्थक कला होगी। राकेश चक्र(उर्वशी)

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