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धर्म/राशिफल

नवरात्रि में जरूर जाएं माता के इन 7 मंदिरों में, यहां दर्शन मात्र से दूर होते हैं सारे संकट!

भारत के इन प्रसिद्ध शक्तिधामों से जुड़ी हैं रहस्यमयी और पौराणिक कथाएं, जानिए कौन-कौन से मंदिर हैं इस लिस्ट में

Priya Anand

11 अक्टूबर, रविवार से देशभर में शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत होगी। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त माता रानी का आशीर्वाद पाने के लिए मंदिरों में दर्शन, पूजा और विशेष अनुष्ठान करते हैं। भारत में देवी शक्ति को समर्पित कई ऐसे मंदिर हैं, जिन्हें बेहद पवित्र और चमत्कारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन मंदिरों में दर्शन और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहीं चट्टानों से निकलती अखंड ज्वाला देवी की मौजूदगी का प्रतीक मानी जाती है, तो कहीं गुफा में विराजमान माता के दर्शन को बेहद शुभ माना जाता है। अगर आप भी नवरात्रि में किसी शक्तिस्थल के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो इन 7 मंदिरों के बारे में जरूर जानें।

वैष्णो देवी, कटरा

वैष्णो देवी, कटरा

जम्मू-कश्मीर की त्रिकूट पहाड़ियों में स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिस्थलों में से एक है। नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि माता वैष्णवी ने भैरव नाथ से बचने के लिए त्रिकूट पर्वत की गुफा में शरण ली थी। बाद में देवी ने महाकाली का रूप धारण कर भैरव नाथ का वध किया। कहा जाता है कि भैरव नाथ को क्षमा करते हुए माता ने वरदान दिया कि उनके दर्शन के बाद भैरव बाबा के दर्शन करना भी तीर्थयात्रा का हिस्सा होगा।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता

दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता

हुगली नदी के किनारे स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर मां काली की उपासना का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान यहां भक्तों और पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाती है। यहाँ माँ काली का 'भवतारिणी' स्वरूप विराजमान है। बंगाल की संस्कृति के अनुरूप यहां महासप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी पर विशेष हवन, महाभोग और दर्शन के लिए भारी संख्या में भक्त पहुँचते हैं।

ज्वाला जी, कांगड़ा

ज्वाला जी, कांगड़ा

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित ज्वाला देवी मंदिर अपनी प्राकृतिक ज्वालाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां देवी की पारंपरिक मूर्ति नहीं है, बल्कि चट्टान से निकलने वाली ज्योतियों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहां देवी सती की जीभ गिरी थी। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव के तांडव के समय भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के अंगों को काटा था, जिससे उनकी जीभ यहाँ गिरी। नवरात्रि में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है।

कामाख्या मंदिर, असम

कामाख्या मंदिर, असम

गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर देश के प्रमुख शक्ति मंदिरों में शामिल है। जब भगवान शिव माता सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने चक्र से उनके अंग काटे; नीलांचल पर्वत पर योनि गिरने से यह पीठ बना। कामाख्या को विश्व का सर्वोच्च कौमारी तीर्थ माना जाता है, जहाँ नवरात्रि व अन्य विशेष अवसरों पर कन्या पूजन और कुमारी पूजा का अत्यधिक महत्व है। यहां शक्ति पूजा से जुड़ी अनूठी परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं इसे विशेष बनाती हैं।

मनसा देवी मंदिर, हरिद्वार

मनसा देवी मंदिर, हरिद्वार

हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर स्थित मनसा देवी मंदिर में सालभर श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना यहां पूरी होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ मनसा का प्रकट होना भगवान शिव के मन से हुआ था, इसलिए इन्हें शिव की 'मानस पुत्री' कहा जाता है। 'मनसा' शब्द का अर्थ 'मन की इच्छा' होता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से देवी का स्मरण करता है, माँ उसकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।

चामुंडा देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

चामुंडा देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

कांगड़ा में स्थित यह मंदिर देवी चामुंडा के उग्र स्वरूप को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता चामुंडा को देवी दुर्गा का ही रौद्र रूप (माता काली का स्वरूप) माना जाता है। भगवती दुर्गा ने यहीं चंड और मुंड नामक राक्षसों का वध किया था, जिसके बाद उनका नाम 'चामुंडा' पड़ा। नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की विशेष भीड़ रहती है।

अंबाजी मंदिर, गुजरात

अंबाजी मंदिर, गुजरात

गुजरात का अंबाजी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख तीर्थ है। पौराणिक कथा के अनुसार, यहाँ माता सती का हृदय गिरा था, जिस कारण इसे 'हृदय पीठ' भी कहा जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां पूजा के साथ गरबा और डांडिया का उत्सव भी खास आकर्षण रहता है।

नवरात्रि में इन मंदिरों के दर्शन भक्तों के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ा खास अवसर माने जाते हैं।

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