बंगाल में दुर्गापूजा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। यही वजह है कि पूजा की तारीखों को लेकर लोगों की उत्सुकता साल भर बनी रहती है। इस बार दुर्गोत्सव के दौरान दो दिन सप्तमी पड़ने के बाद अब 2027 में दो दिन अष्टमी मनाए जाने की संभावना है। वहीं, 2028 की दुर्गापूजा को लेकर एक और दिलचस्प स्थिति सामने आई है। दो अलग-अलग पंचांग प्रणालियों की गणना के अनुसार, उस साल दुर्गापूजा सितंबर और अक्टूबर में अलग-अलग तारीखों पर मनाई जा सकती है। हालांकि, दोनों वर्षों की तारीखें फिलहाल संभावित हैं। अंतिम कार्यक्रम संबंधित पंचांगों और धार्मिक संस्थाओं की गणना के अनुसार तय होगा।
इस साल दुर्गापूजा में सप्तमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण उत्सव का एक अतिरिक्त दिन देखने को मिला। अब अगले साल भी पूजा के दौरान तिथि का ऐसा ही विशेष संयोग बनने की संभावना है। उपलब्ध पंचांग-आधारित गणना के अनुसार, 2027 में महाषष्ठी 5 अक्टूबर, मंगलवार को और महासप्तमी 6 अक्टूबर, बुधवार को पड़ सकती है।
इसके बाद महाअष्टमी 7 अक्टूबर, गुरुवार को होगी। हालांकि, अष्टमी तिथि 8 अक्टूबर, शुक्रवार तक जारी रहने की संभावना है। इसी कारण दोनों दिन अष्टमी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-विधियों का महत्व रह सकता है। 8 अक्टूबर को संधि पूजा का समय भी पड़ने की संभावना जताई गई है। संभावित कार्यक्रम के अनुसार, महानवमी 9 अक्टूबर, शनिवार और विजयादशमी 10 अक्टूबर, रविवार को होगी। वहीं, कोजागरी लक्ष्मी पूजा 14 अक्टूबर को पड़ सकती है।
इस संभावित कार्यक्रम से पूजा आयोजकों, पुरोहितों और श्रद्धालुओं को पहले से तैयारियां करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अलग-अलग पंचांगों में तिथि और अनुष्ठानों के समय को लेकर अंतर संभव है। इसलिए अंतिम तारीखों की पुष्टि के लिए संबंधित पंचांग देखना जरूरी होगा।
2028 की दुर्गापूजा को लेकर स्थिति और भी असामान्य हो सकती है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दो प्रमुख पंचांग प्रणालियां उस साल दुर्गापूजा के लिए अलग-अलग तारीखें निर्धारित कर सकती हैं। एक के अनुसार पूजा सितंबर में, जबकि दूसरी के अनुसार अक्टूबर में आयोजित होने की संभावना है।
विशुद्ध सिद्धांत या दृक् सिद्धांत पंचांग का पालन करने वाले बेलूर मठ और रामकृष्ण मिशन से जुड़े श्रद्धालु 23 से 27 सितंबर 2028 के बीच दुर्गापूजा मना सकते हैं। दूसरी ओर, सूर्य सिद्धांत पर आधारित गुप्त प्रेस पंचांग का पालन करने वाली अधिकांश सामुदायिक और पारंपरिक घरेलू पूजाएं 8 से 12 अक्टूबर के बीच हो सकती हैं।
इस तरह दोनों पंचांगों के अनुसार पूजा की तारीखों में लगभग 15 दिनों का अंतर देखने को मिल सकता है। हालांकि, संबंधित संस्थाओं और पंचांग विशेषज्ञों की ओर से अंतिम तारीखों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
दुर्गापूजा की तिथियां तय करने में सूर्य, चंद्रमा, चंद्र मास और संक्रांति से जुड़ी गणनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अलग-अलग पंचांग प्रणालियां इन खगोलीय स्थितियों की गणना के लिए अलग-अलग पद्धतियों का इस्तेमाल करती हैं। इसी कारण कभी-कभी किसी तिथि या महीने के निर्धारण में अंतर आ जाता है और त्योहार की तारीखें अलग हो सकती हैं।
विशुद्ध सिद्धांत या दृक् सिद्धांत में सूर्य और चंद्रमा की गणना में उनकी वास्तविक खगोलीय स्थितियों को ध्यान में रखा जाता है। वहीं, सूर्य सिद्धांत प्राचीन खगोलीय गणना-पद्धतियों पर आधारित है। जब चंद्र मास और सूर्य की राशि परिवर्तन से जुड़ी गणनाओं के बीच विशेष स्थिति बनती है, तो दोनों प्रणालियां त्योहार के लिए अलग-अलग समय निर्धारित कर सकती हैं।
पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार, 2028 में संभावित अंतर भी इसी तरह की गणना से जुड़ा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी श्रद्धालु एक ही साल में दो बार दुर्गापूजा करेंगे। बल्कि अलग-अलग पंचांगों का पालन करने वाले समूह अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार अलग तारीखों पर पूजा कर सकते हैं।
दुर्गापूजा की तारीखों को लेकर अलग-अलग पंचांगों में बड़ा अंतर पहले भी देखने को मिला है। रिपोर्टों के अनुसार, 1963 और 1982 में भी बेलूर मठ और रामकृष्ण मिशन की पूजा उन लोगों की पूजा से पहले हुई थी, जो गुप्त प्रेस पंचांग का पालन करते हैं। उन वर्षों में दोनों प्रणालियों के अनुसार पूजा की तारीखों में लगभग एक महीने का अंतर था। उस समय भी सरकारी छुट्टियों का निर्धारण व्यापक रूप से प्रचलित सूर्य सिद्धांत पंचांग के आधार पर किया गया था। हालांकि, विशुद्ध सिद्धांत पंचांग के अनुसार पूजा करने वालों को भी संबंधित तारीखों पर छुट्टी लेने की अनुमति दी गई थी।
2028 में पूजा की दो संभावित समय-सारिणियों के कारण सरकारी छुट्टियों, स्कूल-कॉलेजों के अवकाश और सामुदायिक पूजा समितियों की तैयारियों को लेकर सवाल उठ सकते हैं। फिलहाल, 2028 के लिए छुट्टियों का कोई अंतिम सरकारी कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। यह निर्णय संबंधित अधिकारियों की ओर से लिया जाएगा।
पूजा समितियों को भी अंतिम तारीखों के अनुसार आयोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य तैयारियां तय करनी होंगी। श्रद्धालुओं के लिए भी यात्रा, छुट्टियों और पारिवारिक कार्यक्रमों की योजना बनाते समय अंतिम पंचांग देखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल, 2027 में दो दिन अष्टमी और 2028 में अलग-अलग पंचांगों के अनुसार सितंबर तथा अक्टूबर में दुर्गापूजा होने की संभावनाओं ने बंगाल में त्योहार को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि, दोनों वर्षों की अंतिम तारीखों के लिए संबंधित पंचांगों की पुष्टि का इंतजार करना होगा।