उड़ने की वजह AI Generated Image
पाठकों की कविताएँ

उड़ने की वजह

कविता

Om Prakash Mishra

पंख नहीं थे फिर भी,

मैंने आसमान चुन लिया,

रास्ते मुश्किल थे मगर,

मैंने चलना सीख लिया।

लोगों ने कहा—“रुक जाओ,

ये मंज़िल आसान नहीं,”

दिल ने कहा—“चलते रहो,

कोशिश कभी बेकार नहीं।”

गिरकर उठना सीखा मैंने,

आँसू छुपाकर हँसना भी,

टूटे सपनों के टुकड़ों से,

नया ख़्वाब बनाना भी।

हर सुबह एक उम्मीद बनी,

हर रात ने कुछ सिखाया,

जिसे मैं अपनी हार समझी,

वही मुझे आगे ले आया।

अब डर नहीं किसी तूफ़ान का,

न मंज़िल की जल्दी है,

मुझे पता है—मेरी उड़ान

अभी बहुत लंबी चलनी है।

-खुशी डागा

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