टोंक के एक गांव में निकाय चुनाव का बहिष्कार 
राजस्थान

सचिन पायलट के गढ़ में निकाय चुनाव का बहिष्कार

टोंक : राजस्थान में नगर निकाय चुनावों की सरगर्मियों के बीच सचिन पायलट के गढ़ टोंक में एक गांव के लोगों ने चुनाव के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। डारडाहिन्द गांव के लोगों ने परिसीमन से नाराज होकर यह फैसला किया है। परिसीमन में उनके गांव को पंचायत से हटाकर नगर परिषद क्षेत्र में शामिल कर दिया गया था। इसके बाद गांव की जनता ने निर्णय लिया कि वह नगर परिषद चुनाव का बहिष्कार करेंगे और गांव से न ही कोई चुनाव लड़ेगा और न ही गांव में वोट डाले जाएंगे। ग्रामीणों की मांग है कि गांव को पुनः ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जाए।

एसडीएम की समझाने की कोशिश नाकाम

ग्रामीणों को समझाने के लिए SDM सीमा खेतान और तहसीलदार अजित पाल सिंह यादव गांव पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर चुनाव में मतदान करने की अपील की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे और प्रशासन के समझाने का भी उनपर कोई असर नहीं पड़ा। ग्रामीणों ने दो स्पष्ट रूप से कह दिया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती वे निकाय चुनाव में एक भी वोट नहीं डालेंगे और गांव से कोई भी प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ेगा।

मुर्गा बन जाएंगे लेकिन वोट नहीं डालेंगे

ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि पिछले करीब 18 महीनों से गांव में विकास कार्य ठप पड़े हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर गांव की समस्याओं को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि यदि गांव को नगर निकाय में शामिल किया गया तो हर चीज के दाम बढ़ेंगे और इसके बावजूद गांव का विकास नहीं होगा। खबरों के अनुसार ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा, प्रशासन कहेगा तो हम मुर्गा बन जाएंगे लेकिन एक भी वोट नहीं डालेंगे।

'किसी को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा'

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि चुनाव के दिन गांव के गेट पर ताला लगाया जाएगा और किसी को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांग को लेकर प्रशासन की ओर से एसडीएम और तहसीलदार गांव पहुंचे लेकिन उनकी मांग के बावजूद कोई भी नेता उनसे मिलने नहीं आया. ग्रामीणों ने एसडीएम सीमा खेतान का आभार जताते हुए कहा कम से कम आपने हमारी सुध तो ली भले ही 18 महीने बाद ली। ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि न तो वे मतदान करेंगे और न ही किसी राजनीतिक दल से कोई प्रत्याशी गांव से उम्मीदवारी जताएगा। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक डारदाहिन्द को पुनः ग्राम पंचायत नहीं बनाया जाता, उनका आंदोलन और चुनाव बहिष्कार जारी रहेगा।

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