जयपुर : राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को दावा किया कि राजस्थान इस समय दशक के सबसे बड़े अकाल का सामना कर रहा है और सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
गहलोत ने कहा, राजस्थान में पिछले 10 साल का सबसे बड़ा अकाल सामने है। जोधपुर जिले के करीब 2,000 गांवों में सूखे जैसे हालात हैं। बाड़मेर के 2,460, बालोतरा के 1,216 और जैसलमेर के 961 गांव सूखे की चपेट में हैं। पशुओं के चारे का संकट भी बढ़ता जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कमोबेश यही स्थिति पूरे मारवाड़ और राज्य के अन्य हिस्सों में भी है। उन्होंने चारे की बढ़ती कीमतों का जिक्र करते हुए कहा, जोधपुर, बाड़मेर और बालोतरा में चारे की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। बताया जा रहा है कि चारा 1,200 रुपये प्रति मण बिक रहा है और पशुपालकों के लिए इसे खरीदना मुश्किल हो गया है। इससे पशुओं के लिए संकट बढ़ रहा है।
गहलोत ने कहा कि अकाल और सूखे की सबसे अधिक मार बेजुबान पशुओं पर पड़ती है।उन्होंने कहा कि चारे की कीमत बढ़ने से पशुपालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है और कई बार वे पशुओं को खुले में छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं ऐसे हालात में भूख व प्यास से तड़पते पशुओं की जान तक चली जाती है।
गहलोत सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील करते हुए कहा, सरकार को चारे की बढ़ती कीमतों पर तुरंत रोक लगानी चाहिए और प्रदेशभर में चारे तथा पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए मजदूरी और रोजगार की तैयारी भी अभी से शुरू की जानी चाहिए, ताकि सूखे से प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सके।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर ढिलाई बरतने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, बाड़मेर में दो दिन पहले मुख्यमंत्री ने जो घोषणाएं की थीं, बताया जा रहा है कि 48 घंटे बाद भी प्रशासन को सरकार से लिखित स्वीकृति का इंतजार है। ऐसी ढिलाई से काम नहीं चलेगा। हमारे सामने बहुत चुनौतीपूर्ण समय आ रहा है। सरकार को तुरंत हरकत में आकर प्रदेशभर के लिए एक व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना बनानी होगी और आवश्यक स्वीकृतियां जारी करनी होंगी।