कोलकाता सिटी

श्रीरामपुर बॉर्डर पर थमे कार्बन लदे करीब 100 ट्रकों के पहिए, उद्योगों की सप्लाई पर बढ़ी चिंता

Neha Singh

सन्मार्ग संवाददाता

श्रीरामपुर : श्रीरामपुर बॉर्डर पर पिछले कई दिनों से कार्बन लदे करीब 100 ट्रकों के पहिए थमे हुए हैं। बताया जा रहा है कि इन ट्रकों में असम के बोंगाईगांव स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की रिफाइनरी से निकला कार्बन लदा है। जानकारी के मुताबिक, इन वाहनों को पश्चिम बंगाल की सीमा में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, ट्रकों को रोके जाने की आधिकारिक वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।

मामला अब केवल बॉर्डर पर खड़े ट्रकों तक सीमित नहीं रह गया है। अगर कार्बन की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो इसका असर अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों की सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। कार्बन का इस्तेमाल कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। एल्यूमिनियम, लौह-इस्पात और अन्य क्षेत्रों के अलावा रक्षा उत्पादन से जुड़ी कुछ औद्योगिक गतिविधियों में भी इसकी जरूरत बताई जा रही है।

100 ट्रक, लेकिन चिंता कई उद्योगों की

श्रीरामपुर बॉर्डर पर एक साथ करीब 100 ट्रकों के रुकने से यह सवाल उठने लगा है कि अगर कच्चे माल की आपूर्ति समय पर नहीं हुई, तो इसका असर उत्पादन पर कितना पड़ सकता है। खासकर उन इकाइयों के लिए, जहां कार्बन उत्पादन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लगातार आपूर्ति बाधित होना चुनौती बन सकता है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित उद्योगों के पास कार्बन की वैकल्पिक सप्लाई की व्यवस्था है या नहीं। इसी तरह यह भी सामने नहीं आया है कि ट्रकों के रुकने से अब तक किसी औद्योगिक इकाई का वास्तविक उत्पादन प्रभावित हुआ है या नहीं।

आखिर किसके आदेश पर रोके गए ट्रक?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्बन लदे करीब 100 ट्रकों को पश्चिम बंगाल में प्रवेश क्यों नहीं दिया जा रहा है। क्या वाहनों को रोकने के संबंध में कोई लिखित आदेश जारी किया गया है? यदि आदेश है, तो वह किस विभाग या अधिकारी की ओर से जारी हुआ है?

दूसरी ओर, यदि यह सामग्री औद्योगिक और रक्षा उत्पादन से जुड़ी इकाइयों तक पहुंचनी है, तो लंबे समय से जारी इस गतिरोध को दूर करने के लिए संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।

फिलहाल श्रीरामपुर बॉर्डर पर ट्रकों के पहिए थमे हुए हैं और उद्योगों तक कार्बन की नियमित आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि ट्रकों की आवाजाही कब शुरू होती है और सप्लाई बाधित रहने का औद्योगिक गतिविधियों पर वास्तविक असर कितना पड़ता है।

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