कोलकाता : श्री वर्द्धमान जैन संघ में मुनि रविन्द्र विजय महाराज एवं मुनि महेन्द्र विजय महाराज के सान्निध्य में सत्रहभेदी पूजा का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ हुआ। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर तीर्थंकर भगवान की आराधना की और धार्मिक वातावरण में भाव-विभोर हो उठे।
इस अवसर पर मुनि रविन्द्र विजय महाराज ने जैन धर्म में अष्टमंगल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये आठ पवित्र एवं शुभ प्रतीक जिन शासन में मंगल स्वरूप माने गए हैं। मंदिरों, पूजा स्थलों और मांगलिक अवसरों पर इनका विशेष महत्व है।
उन्होंने बताया कि स्वस्तिक, श्रीवत्स, नन्द्यावर्त, वर्धमानक, भद्रासन, कलश, मीनयुगल और दर्पण अष्टमंगल के प्रमुख प्रतीक हैं। कार्यक्रम में संघ के ट्रस्टी एवं अध्यक्ष कमल सिंह रामपुरिया, सचिव विजय चंद बैद सहित मुल्तान चंद सुराणा, दिलीप दुगड़, विनीत रामपुरिया, नरेंद्र बांठिया, महेंद्र सुराणा, मोहनलाल कोचर,
शांतिलाल रामपुरिया, देवेंद्र कोचर, पारस सावनसुखा, अशोक बांठिया, महेंद्र डागा, संजय रामपुरिया, शिखर चंद बांठिया, सुनील बांठिया, सौरभ सुराणा, मनीष कोचर, राजेंद्र उपाध्याय एवं विजय कोचर सहित कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहयोग दिया।