जगन्नाथ चट्टोपाध्याय 
कोलकाता सिटी

कुलपतियों पर भी गिरेगी गाज? उच्च शिक्षा मंत्री के बयान से हलचल

भ्रष्टाचार पर सरकार सख्त, कुलपतियों को चेतावनी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय के एक बयान ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता उच्च शिक्षा को भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करना है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि जांच में विश्वविद्यालयों में वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आती हैं तो कुलपतियों के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

मंत्री ने कहा, "आपने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चट्टोपाध्याय को जेल जाते देखा है। यदि भविष्य में किसी विश्वविद्यालय के कुलपति को भी प्रेसिडेंसी, दमदम या अलीपुर जेल में देखें तो हैरान होने की जरूरत नहीं है।" उनके इस बयान को राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति का संकेत माना जा रहा है।

जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था में योग्यता की बजाय भ्रष्टाचार और राजनीतिक प्रभाव को बढ़ावा मिला। उन्होंने दावा किया कि फार्मेसी, बीएड, आईटीआई और पॉलिटेक्निक जैसे निजी संस्थानों के नाम पर "डिग्री की दुकानें" चलाई गईं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पिछले डेढ़ दशक में स्थापित निजी शिक्षण संस्थानों का व्यापक ऑडिट और निरीक्षण कराएगी तथा रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। नए निजी संस्थानों को मंजूरी भी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही दी जाएगी।

छात्रसंघ चुनाव के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को फिर से छात्रों के लिए आकर्षक बनाना है। पर्याप्त संख्या में छात्रों की वापसी के बाद ही छात्रसंघ चुनाव कराने पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि शिक्षकों और शोधकर्ताओं की नियुक्ति पूरी तरह पारदर्शी होगी तथा उसमें किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं रहेगी।

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