प्रसेनजीत
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद मतदाता सूची से नाम हटने का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बर्धमान के साहिल आलम शेख, कूचबिहार के जियानुल मियां, नदिया के गौर हलदार और मुर्शिदाबाद की तस्मीन शेख जैसे कई लोग इस बार मतदान के अधिकार से वंचित रह गए हैं।
अपील की उम्मीद में ये लोग जोका स्थित अपीलेट ट्रिब्यूनल पहुंचे, लेकिन उन्हें परिसर में प्रवेश तक नहीं मिला। हाल ही में 106 प्रभावित मतदाताओं का एक समूह भी वहां पहुंचा, पर सभी को गेट से ही लौटा दिया गया। उनके साथ मौजूद वकीलों को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली, जिससे व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
लोग दूर से आए, लेकिन किसी ने बात नहीं सुनी
कोलकाता प्रेस क्लब में पत्रकारों से मुखातिब होकर अधिवक्ता शिप्रोवोन कुमार सील ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के सात दिन बाद भी ट्रिब्यूनल में सुनवाई की कोई व्यवस्था नहीं दिख रही है।” वहीं हाई कोर्ट के वकील एम.डी. बानी इस्राइल ने बताया कि उनका खुद का नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया और उन्हें भी जोका ट्रिब्यूनल में प्रवेश से रोक दिया गया।
तस्मीन शेख ने कहा, “हम गरीब लोग हैं, तीन पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं, फिर भी हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।” मोस्ताकी बेगम ने भी अपनी पीड़ा जताते हुए कहा, “हम इतनी दूर से आए, लेकिन किसी ने हमारी बात तक नहीं सुनी।” हाई कोर्ट के वकील अरिंदम दास, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से त्वरित सुनवाई का आदेश मिला था, उन्हें भी नोडल अधिकारी तक पहुंचने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “अगर वकीलों के साथ ऐसा हो रहा है, तो आम लोगों की स्थिति समझी जा सकती है।”
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट से मांगी रिपोर्ट
डायमंड हार्बर रोड स्थित अपीलेट ट्रिब्यूनल में कड़ी सुरक्षा के बीच आम लोगों, वकीलों और बीएलओ को प्रवेश नहीं मिल रहा, जिससे व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि SIR के तहत बने ट्रिब्यूनल प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, चुनाव आयोग ने स्थिति सुधारने के लिए जल्द हेल्प डेस्क शुरू करने का संकेत दिया है, लेकिन फिलहाल कई मतदाता अपने अधिकार से वंचित हैं।