कोलकाता सिटी

100% वेबकास्टिंग पर सख्ती, सेंट्रल फोर्सेज को रोकने पर होगी कार्रवाई : ECI

जमीनी स्तर पर 100% फेयर, फ्री और शांतिपूर्ण चुनाव कराना लक्ष्य 2026 विधानसभा चुनाव :

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। ECI और राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर का दफ्तर इस बार चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। हाल में हुए कालीगंज विधानसभा उपचुनाव के अनुभव के आधार पर आयोग ने साफ संकेत दिया है कि इस बार “प्रैक्टिकली 100%” वेबकास्टिंग और सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

कालीगंज मॉडल से भी आगे जाने की तैयारी

राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर मनोज अग्रवाल ने कहा कि कालीगंज विधानसभा उपचुनाव में जो कदम उठाए गए थे, उससे भी बेहतर व्यवस्था आगामी विधानसभा चुनाव में लागू की जाएगी। उनका कहना है कि लक्ष्य सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर 100% फेयर, फ्री और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है।

हर बूथ की लाइव निगरानी, अलग से ड्यूटी पर कर्मचारी

सूत्रों के मुताबिक, सीईओ ऑफिस, हर विधानसभा सेंटर और रिटर्निंग ऑफिसर दफ्तर में सरकारी कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई जाएगी। ये कर्मचारी 4 से 5 घंटे सिर्फ वेबकास्टिंग मॉनिटरिंग पर तैनात रहेंगे। ड्यूटी खत्म होने के बाद प्रत्येक कर्मचारी लिखित रूप में दर्ज करेगा कि उसने अपने समय में क्या देखा। यदि किसी बूथ पर गड़बड़ी या तकनीकी समस्या दिखी, तो दिए गए निर्देश भी रिकॉर्ड में दर्ज किए जाएंगे। संबंधित कर्मचारी अपने हस्ताक्षर के साथ रिपोर्ट जमा करेगा। आयोग का मानना है कि इस लिखित जवाबदेही से निगरानी तंत्र ज्यादा प्रभावी और जिम्मेदार बनेगा।

पहले हजारों बूथों पर नहीं हुई थी वेबकास्टिंग

गौरतलब है कि पूर्व में 100% वेबकास्टिंग का दावा किया गया था, लेकिन मतदान के दिन कई हजार बूथों पर न तो वेबकास्टिंग हो सकी और न ही सीसीटीवी या वीडियोग्राफी की समुचित व्यवस्था थी। इस बार आयोग इसी कमी को दूर करने के लिए सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम लागू कर रहा है।

सेंट्रल फोर्सेज को रोकने पर कड़ी चेतावनी

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोग ने स्पष्ट किया कि सेंट्रल फोर्सेज की तैनाती में किसी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेंट्रल फोर्सेज को रोका या गुमराह नहीं किया जा सकेगा। यदि सेंट्रल फोर्सेज की तैनाती या मूवमेंट में बाधा आई, तो उसकी जिम्मेदारी राज्य पुलिस पर तय होगी। बैठक में यह संकेत दिया गया कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई पर सख्त कार्रवाई संभव है।

फुल बेंच की बैठकों के बाद होंगे अहम फैसले

अब नजर इस बात पर है कि आयोग की फुल बेंच राज्य प्रशासन के साथ बैठक के बाद क्या अतिरिक्त कदम उठाती है। इसके बाद मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ परामर्श कर अंतिम रणनीति तय की जाएगी। राज्य में चुनावी सरगर्मी के बीच आयोग का यह रुख साफ संकेत देता है कि 2026 का विधानसभा चुनाव कड़े नियंत्रण और बहुस्तरीय निगरानी के तहत कराया जाएगा।

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