विशेष बच्चों को शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ‘मनोविकास केंद्र’ लगातार प्रयासरत है। न्यूरो-डेवलपमेंटल विकारों और विभिन्न चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों व युवाओं के पुनर्वास के लिए समर्पित यह संस्थान शिक्षा, थेरेपी, आधुनिक चिकित्सा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी क्षमताओं को विकसित करने पर जोर दे रहा है। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया में परिवारों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
केंद्र की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, विशेष बच्चों को उनकी क्षमता के अनुरूप सीखने और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए वर्षभर कई पहल की गई। इनमें मूल्यांकन, शैक्षणिक सहयोग, थेरेपी तथा कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। केंद्र की कोशिश बच्चों को केवल शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें भविष्य में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तैयार करना है।
इस क्रम में 300 बच्चों का निःशुल्क मूल्यांकन किया गया। इससे बच्चों की जरूरतों और उनकी क्षमताओं को समझने तथा उनके लिए उपयुक्त सहयोग की दिशा तय करने में मदद मिली। वहीं, ओपन स्कूलिंग के माध्यम से शिक्षा जारी रखने वाले 47 विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षा में सफलता हासिल की। इसे विशेष बच्चों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक अवसरों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
केंद्र का जोर ऐसे वातावरण के निर्माण पर है, जहां विशेष बच्चे अपनी क्षमता के अनुसार सीख सकें, कौशल विकसित कर सकें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें। शिक्षा, चिकित्सा, थेरेपी, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पारिवारिक सहयोग के समन्वय के जरिए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
मनोविकास केंद्र की चेयरपर्सन डॉ. अनुराधा लोहिया ने कहा, “मनोविकास केंद्र को लेकर मेरा सपना एक ऐसे संस्थान का निर्माण करना है, जहां प्रत्येक बच्चे को उसकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप अत्याधुनिक थेरेपी, व्यक्तिगत देखभाल और समुचित मार्गदर्शन मिल सके। हमारा दृष्टिकोण भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए निदान, शिक्षण, अधिगम और थेरेपी की प्रक्रियाओं को अधिक संवेदनशील, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने पर केंद्रित है। \" उन्होंने यह भी कहा, \"हम प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट क्षमताओं, चुनौतियों और संभावनाओं को गहराई से समझते हुए उसके सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहते हैं, ताकि वह अपनी पूरी क्षमता का विकास कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ें।”