सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : केन्द्रीय बजट 2026 को यदि समग्र दृष्टि से देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि इसमें अर्थव्यवस्था के लगभग सभी प्रमुख पक्षों—कृषि, उद्योग, एमएसएमई, मध्यम वर्ग, युवा, महिला, अवसंरचना और सामाजिक क्षेत्र का संतुलित रूप से ध्यान रखा गया है। विशेष रूप से यह बजट पर्यटन क्षेत्र के लिए आदर्श और दूरदर्शी कहा जा सकता है।
ट्रैवेल एजेंट्स एसोसियेशन ऑफ इंडिया, ईस्ट के चेयरमेन व एयरकॉम ट्रैवेल्स के डायरेक्टर अंजनी धानुका ने बताया कि पर्यटन केवल मनोरंजन या आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि यह रोजगार सृजन, स्थानीय उद्यमिता, सांस्कृतिक संरक्षण और क्षेत्रीय विकास का सशक्त इंजन है। बजट 2026 में बुनियादी ढांचे के विस्तार, सड़क, रेल और हवाई संपर्क को सुदृढ़ करने, तथा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर दिए गए जोर से घरेलू पर्यटन उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा। धार्मिक, सांस्कृतिक, विरासत, ग्रामीण और ईको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ देश के कम विकसित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति देंगी।
पर्यटन से जुड़े होटल, होम-स्टे, ट्रैवल, हैंडीक्राफ्ट, स्थानीय गाइड और छोटे व्यापारियों को एमएसएमई और स्टार्टअप प्रोत्साहनों का लाभ मिलना तय है। इससे न केवल प्रत्यक्ष रोजगार बढ़ेगा, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से लाखों परिवारों की आय में भी वृद्धि होगी। डिजिटल सुविधाओं, ऑनलाइन बुकिंग, स्मार्ट सिटी और स्वच्छता अभियानों के साथ पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में बजट के प्रावधान स्वागतयोग्य हैं।
विदेशी पर्यटन को भी बजट से अच्छा बढ़ावा मिलेगा, बजट मैं टीसीएस की सीमा को 5 एवं 20 प्रतिशत से घटा कर 2 प्रतिशत कर दिया है, उदारीकृत प्रेषण योजना (Liberalised Remittance Scheme - LRS) मे भी इस को 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बदलाव से विदेशी पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
महिला शिक्षा के छेत्र मे भी बजट मे हर जिले मे महिला छात्रावास बनाने का प्रावधान एक मील का पत्थर साबित होगा। कुल मिलाकर, केन्द्रीय बजट 2026 न केवल सभी वर्गों के हितों का संतुलन साधता है, बल्कि पर्यटन को विकास की मुख्यधारा में लाकर इसे रोजगार और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बनाता है।