दीपक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : न्यू मार्केट के मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित होटल ‘शिखा इन’ अग्निकांड में मारे गए दो और लोगों की पहचान गुरुवार को हो गई। दोनों मृतक बांग्लादेशी नागरिक थे। इसके साथ ही इस हादसे में जान गंवाने वाले बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। कुल नौ लोगों की इस अग्निकांड में मौत हुई है। गुरुवार को जिन दो शवों की पहचान हुई, उनमें 45 वर्षीय एसएम अलीमुज्जमां और रेवती सरकार शामिल हैं। दोनों बांग्लादेश के सतखीरा जिले के कालीगंज उपजिला के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान होटल से मिले दस्तावेजों, पासपोर्ट और बांग्लादेश हाई कमीशन के रिकॉर्ड का मिलान करने के बाद की गई।
दस्तावेजों के मिलान से हुई पहचान
पुलिस और संबंधित अधिकारियों ने मृतकों की पहचान की पुष्टि के लिए होटल के दस्तावेजों के साथ उनके पासपोर्ट और बांग्लादेश हाई कमीशन से मिले दस्तावेजों का मिलान किया। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
इलाज के लिए आए थे अलीमुज्जमां
अलीमुज्जमां के एक रिश्तेदार ने बताया कि वह कोलकाता में मौजूद थे, जब उन्हें बांग्लादेश से परिवार के एक सदस्य ने हादसे की जानकारी दी। बाद में उन्होंने पता लगाया तो पुष्टि हुई कि अलीमुज्जमां उसी होटल में ठहरे हुए थे। रिश्तेदार के मुताबिक, अलीमुज्जमां कारोबारी थे और इलाज के सिलसिले में कोलकाता आए थे। उन्होंने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि ऐसी त्रासदी दोबारा नहीं होनी चाहिए।
सभी की मौत दम घुटने से हुई
पुलिस के मुताबिक, आग में मारे गए सभी नौ लोगों की मौत धुएं में दम घुटने के कारण हुई। शव होटल के कमरों के बिस्तर, फर्श और टॉयलेट से बरामद किए गए थे। हादसे में दो भारतीय नागरिकों सिलीगुड़ी निवासी 68 वर्षीय योग नारायण अग्रवाल और झारखंड के गिरिडीह निवासी 19 वर्षीय संदीप पासवान की भी मौत हुई। संदीप होटल के रिसेप्शन की जिम्मेदारी संभालते थे।
सिर्फ 1,100 वर्गफुट में बना था होटल
‘शिखा इन’ पांच मंजिली इमारत के सेकेंड फ्लोर पर करीब 1,100 वर्गफुट में संचालित हो रहा था। इस छोटे से क्षेत्र में पांच कमरे, बाथरूम, छोटा रिसेप्शन और ट्रांसपोर्टेशन एरिया बनाया गया था। जांच में लकड़ी की लगातार फॉल्स सीलिंग और बेहद सीमित जगह भी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में आशंका है कि शॉर्ट सर्किट से रिसेप्शन में लगी आग का धुआं फॉल्स सीलिंग के जरिए तेजी से दूसरे कमरों तक फैल गया, जिससे लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिला।