कोलकाता : कभी एकजुट होकर सत्ता की राजनीति करने वाली तृणमूल कांग्रेस अब विधानसभा के भीतर भी दो हिस्सों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। गुरुवार को बजट सत्र के पहले दिन विपक्षी बेंच पर जो तस्वीर उभरी, उसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का नया विषय दे दिया।
एक तरफ विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी और उनके समर्थक विधायक थे, तो दूसरी तरफ कुछ दूरी बनाकर ममता बनर्जी के प्रति निष्ठा जताने वाले विधायक बैठे थे। विधानसभा के भीतर सीटों की यह दूरी दरअसल पार्टी के भीतर बढ़ती राजनीतिक दूरी का भी संकेत मानी जा रही है।
दिलचस्प बात यह रही कि एक समय ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री फिरहाद हाकिम ऋतब्रत खेमे की पहली पंक्ति में नजर आए। वहीं शोभनदेव चट्टोपाध्याय, मदन मित्रा और कुणाल घोष जैसे नेता ममता समर्थक खेमे का चेहरा बने रहे।
तृणमूल के भीतर की खींचतान केवल विधानसभा तक ही सीमित नहीं है। संसदीय दल में भी विभाजन की तस्वीर उभर रही है। ऐसे में सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर ‘असली तृणमूल’ होने का दावा किसका भारी पड़ता है।
फिलहाल अदालत से कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है और ऋतब्रत बनर्जी नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने हुए हैं। हालांकि, विधानसभा के पहले दिन का दृश्य यह स्पष्ट कर गया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब मुकाबला केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ही नहीं, बल्कि विपक्ष के भीतर भी है।