कोलकाता : बंगाल में मतदाता सूची संशोधन (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस ने द्वितीय अपीलीय ट्रिब्यूनल के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया है कि उनकी प्रमुख ममता बनर्जी की चिंताएं सही साबित हुई हैं।
पार्टी के अनुसार, न्यायाधिकरण ने 1,474 मामलों की समीक्षा में से 1,468 मतदाताओं को वैध ठहराया, जबकि केवल 6 नाम हटाने योग्य पाये गये। टीएमसी का कहना है कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं को गलत तरीके से सूची से बाहर करने की कोशिश की गई थी। बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में कुल 1,468 मतदाताओं को वोट देने की अनुमति मिली है।
अपीलीय ट्रिब्यूनल से हरी झंडी मिलने के बाद इनके नाम मतदाता सूची में जोड़े गए। इससे पूर्व पहले चरण में लगभग 139 मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया था। इस बार 6 नाम हटाये गये, जबकि पहले चरण में 8 नाम बाहर किए गए थे। दोनों चरणों को मिलाकर करीब 27 लाख मतदाताओं में से केवल 1,607 को ही वोट देने की अनुमति मिल सकी है।
तृणमूल ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल मतदाता सूची को शुद्ध करने के बजाय राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया गया। पार्टी का कहना है कि लाखों “वास्तविक” मतदाताओं को संदिग्ध बताकर उनके अधिकारों को प्रभावित किया गया, जिसे अब न्यायाधिकरण के आंकड़े खारिज करते हैं।
वहीं चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। तृणमूल का आरोप है कि वैध ठहराए गए मतदाता भी मतदान के दिन सूची में शामिल नहीं होंगे। यह अब चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बड़ी बहस का मुद्दा बन चुका है।