कोलकाता : काली पूजा और दीपावली से पहले कोलकाता में पटाखों की खरीद और बिक्री को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इस बार ग्रीन पटाखों की वैधता जांचने के लिए QR कोड व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं होगा।
इसके स्थान पर नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) से स्वीकृत निर्माताओं की सूची के आधार पर पटाखों की पहचान की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, देश में करीब 1,700 निर्माता ग्रीन पटाखे बनाने के लिए NEERI और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) से मंजूरी प्राप्त कर चुके हैं।
NEERI के अधिकारियों ने बुधवार को पटाखा कारोबारियों, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में QR कोड व्यवस्था बंद करने की जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, पहले कई निर्माता दूसरे लाइसेंसधारी निर्माताओं के QR कोड की नकल कर रहे थे। इससे ग्राहकों के लिए असली और नकली पटाखों के बीच अंतर करना मुश्किल हो रहा था।
टाला पार्क बाजी बाजार के आयोजकों में शामिल शुभंकर मन्ना ने बताया कि ग्राहकों की सुविधा के लिए स्वीकृत निर्माताओं की सूची बाजार के बाहर प्रदर्शित की जाएगी।
NEERI के नागपुर स्थित नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ग्रीन फायरक्रैकर्स के समन्वयक आर. जे. कृपादम ने भी स्पष्ट किया कि संस्थान निर्धारित मानकों के अनुसार ग्रीन पटाखे बनाने की व्यवस्था रखने वाले निर्माताओं को ही प्रमाणपत्र देता है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2021 के आदेश और कलकत्ता हाई कोर्ट की मंजूरी के अनुसार, काली पूजा और दीपावली पर केवल ग्रीन पटाखे जलाए जा सकते हैं। इसके लिए रात 8 बजे से 10 बजे तक की दो घंटे की समय-सीमा निर्धारित है। इस अवधि के बाहर पटाखे जलाना या प्रतिबंधित पटाखों का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है।
कोलकाता के ताला पार्क, शहीद मीनार, कालीकापुर और बेहाला में बाजी बाजार लगाए जाते हैं। पुलिस ने कारोबारियों को दुकानों के बीच कम से कम 9 फीट की दूरी बनाए रखने का निर्देश दिया है।
गुरुवार सुबह 11 बजे तक आयोजकों को पटाखों के नमूने जमा करने होंगे। शुक्रवार को कोलकाता पुलिस इनकी जांच करेगी और एक सेट NEERI को भी भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य बाजारों में केवल स्वीकृत ग्रीन पटाखों की बिक्री सुनिश्चित करना है।