ओजोन का अजीब विरोधाभास 
कोलकाता सिटी

कोलकाता में ओजोन का अजीब विरोधाभास

ऊपर की परत सुधरी, लेकिन सांसों में घुलता ओजोन अब भी चिंता

Ravi

कोलकाता: विश्व ओजोन दिवस के बीच कोलकाता में ओजोन को लेकर एक दिलचस्प पर्यावरणीय तस्वीर सामने आई है। वायुमंडल की ऊपरी परत में मौजूद सुरक्षात्मक ओजोन परत धीरे-धीरे सुधार की ओर बढ़ रही है, लेकिन जमीन के करीब मौजूद ओजोन यानी ग्राउंड-लेवल ओजोन अब भी शहर की हवा के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों तरह के ओजोन को अलग-अलग समझना जरूरी है।

2026 की गर्मियों में नहीं मिला मानक से अधिक ओजोन

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के विश्लेषण के अनुसार कोलकाता में गर्मियों के दौरान ओजोन की स्थिति में हाल के वर्षों में सुधार दर्ज हुआ है। वर्ष 2021 में राष्ट्रीय आठ घंटे के मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक ओजोन वाले 46 दिन दर्ज किए गए थे।

2025 में यह संख्या घटकर 22 दिन रह गई और 2026 की गर्मियों में ऐसे एक भी दिन की रिपोर्ट नहीं हुई। हालांकि नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 12 दिन ओजोन का स्तर निर्धारित मानक से ऊपर रहा।

हरियाली वाले इलाकों में भी बढ़ा ओजोन का असर

रिपोर्ट में सामने आया कि कोलकाता के कुछ हरित इलाकों में भी ग्राउंड-लेवल ओजोन का स्तर अधिक पाया गया। मार्च से मई 2025 के दौरान रवींद्र सरोवर में 17 दिन, जादवपुर में पांच दिन, रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में तीन दिन और विक्टोरिया मेमोरियल में दो दिन ओजोन मानक से अधिक रहा। इसके विपरीत बालीगंज, विधाननगर और फोर्ट विलियम में ऐसे मामले दर्ज नहीं हुए।

वाहनों और प्रदूषकों की रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है ओजोन

ग्राउंड-लेवल ओजोन सीधे वाहनों या फैक्ट्रियों से उत्सर्जित नहीं होता। नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) और अन्य प्रदूषक धूप में रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे ओजोन बनता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इसका असर सांस की नली और फेफड़ों पर पड़ सकता है तथा बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारी वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।

कोलकाता से सटे हावड़ा में 2025 की गर्मियों के दौरान 92 में से 58 दिन ओजोन मानक से अधिक रहा, जबकि कोलकाता में यह संख्या 22 दिन थी। दासनगर में अकेले 57 दिन ऐसे दर्ज किए गए। CSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि हावड़ा में निगरानी केंद्रों के विस्तार ने आंकड़ों के रुझान को प्रभावित किया हो सकता है।

इसलिए 2026 की गर्मियों में कोलकाता में शून्य ओजोन-उल्लंघन राहत देने वाला संकेत जरूर है, लेकिन वैज्ञानिकों को इसमें मौसम, बारिश, बादल, तापमान और वायुमंडलीय रसायन की भूमिका का भी अध्ययन करना होगा।

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