सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : श्रीराम कथा जीवन को सुंदर बनाने की कथा है.जीवन में कोई काम करने में बाधा आती है,उससे घबराना नहीं चाहिए। राम भक्त हनुमानजी जब राम काज के लिए सीता की खोज के लिए निकले तो सुरसा, सिंहकी व लंकिनी रूपी सात्विक, राजसिक व तामसिक रूपी बाधा आई। हनुमानजी महाराज इन तीनों बाधाओं को पार कर गए क्योंकि हृदय में अपने प्रभु राम को स्मरण करते रहे।
प्रभु राम का स्मरण जीवन को सार्थक बनाता है। ये बातें सत्संग भवन ट्रस्ट मंडल व स्वामी विश्वदेवानंद चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में श्रीराम कथा के अन्तर्गत सुन्दरकाण्ड पर प्रवचन करते हुए गृहस्थ पुरुषोत्तम तिवारी ने सत्संग भवन के स्वामी कृष्णानंद सभागार में कहीं। यह कथा पद्मश्री से सम्मानित साहित्यकार डॉ कृष्णबिहारी मिश्र की पावन स्मृति में आयोजित की गई है।
प्रारंभ में पुस्करानन्द महाराज ने आशीर्वचन दिया।इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों, शिक्षकों को सम्मानित किया गया एवं अग्रसेन धाम की महिला समिति के तरफ से 101विद्यार्थियों को स्कूल बैग, स्टेशनरी सामग्री दी गई। इस अवसर पर सुमन-ओम जालान, वीणा-अशोक चूड़ीवाल, बबीता दीवान, अंजना अग्रवाल, अनिता सिंघानिया, विजय उपाध्याय, संजय उपाध्याय, जयप्रकाश सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन महावीर प्रसाद रावत ने किया।