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कोलकाता सिटी

जितनी जल्दी पहचान, उतनी बेहतर देखभाल

Neha Singh

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : विश्व अल्ज़ाइमर दिवस के अवसर पर Annantaa ने संज्ञानात्मक बदलावों की शुरुआती पहचान और समय रहते डिमेंशिया निदान के महत्व पर जोर दिया। यह पहल वैश्विक थीम “The Earlier You Know, The More You Can Do: A Dementia Diagnosis Matters” के अनुरूप है। इसका उद्देश्य डिमेंशिया को बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में रेखांकित करना और लोगों को स्मृति, सोच, व्यवहार या रोजमर्रा के कामकाज में लगातार बदलावों पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करना है, न कि उन्हें सिर्फ उम्र का हिस्सा मानकर नजरअंदाज करना।

Annantaa की फाउंडर सुश्री माधुरी सरदा (काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट एवं क्लिनिकल हिप्नोथेरेपिस्ट) और को-फाउंडर विधि बंसल (साइकोथेरपिस्ट) लोगों को संज्ञानात्मक और व्यवहार संबंधी बदलावों को गंभीरता से लेने तथा समय पर पेशेवर सहायता लेने की सलाह देती हैं।

स्मृति कमजोर होना डिमेंशिया का जाना-पहचाना लक्षण है, लेकिन शुरुआती संकेतों में एक ही सवाल बार-बार पूछना, हाल की जानकारी भूलना, परिचित शब्द याद न आना, तारीखें/अपॉइंटमेंट भूलना, रोजमर्रा के कामों में दिक्कत, परिचित जगहों पर भ्रम, योजना या निर्णय लेने में कठिनाई, व्यवहार/व्यक्तित्व में बदलाव और गतिविधियों से दूरी भी शामिल हो सकते हैं। कभी-कभार भूलना सामान्य है, लेकिन जब ये बदलाव लगातार बढ़ें और जिंदगी, काम या रिश्तों को प्रभावित करें तो पेशेवर सलाह जरूरी है।

डिमेंशिया स्मृति, सोच, व्यवहार और रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करने वाली स्थितियों का समूह है। अल्ज़ाइमर रोग इसका सबसे आम कारण है। WHO के अनुसार 2021 में विश्व में करीब 57 मिलियन लोग डिमेंशिया के साथ जी रहे थे। भारत में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 7.4% (लगभग 8.8 मिलियन) लोग इससे प्रभावित हैं। पश्चिम बंगाल में यह अनुमान 9.23% है। उम्र सबसे बड़ा जोखिम कारक है, लेकिन 65 वर्ष से कम उम्र में भी (यंग-ऑनसेट डिमेंशिया) यह हो सकता है।

सुश्री माधुरी सरदा कहती हैं, “निदान व्यक्ति की पहचान नहीं बदलता; यह परिवार को स्थिति समझने और तैयारी करने की स्पष्टता देता है। लगातार बदलावों को ‘बुढ़ापे’ का हिस्सा न मानकर मदद लेना सामान्य कदम होना चाहिए।”

शुरुआती निदान से अन्य उपचार योग्य कारणों को खारिज किया जा सकता है, व्यक्ति भविष्य के निर्णयों में शामिल हो सकता है, देखभाल और वित्तीय योजना बना सकता है तथा जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। कलंक और उम्र बढ़ने की धारणा अक्सर सहायता लेने से रोकती है। डिमेंशिया उम्र का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। Annantaa व्यक्तियों और परिवारों को बदलावों को पहचानने, मूल्यांकन कराने और समझ के साथ देखने के लिए प्रोत्साहित करता है—क्योंकि जितनी जल्दी आप जानेंगे, उतना अधिक आप कर सकेंगे।

Annantaa एक मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस संगठन है जो जागरूकता, काउंसलिंग, चिकित्सीय हस्तक्षेप और सामुदायिक पहलों के माध्यम से मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

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