सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : साल के अंत की शुरुआत हो चुकी है। महानगर कोलकाता सहित पूरा देश और दुनिया नये साल के स्वागत की तैयारी में जुट गई है। सड़कों पर सजावट में हो रही है। व्यवसायिक प्रतिष्ठानों ने नये साल की अगवानी के विशेष इंतजाम की घोषणा शुरू कर दी है। ऐसे में साल्टलेक की हृदय स्थली करुणामयी को गुलजार करने वाला मरूधर मेला अछूता कैसे रह सकता है? जैसे-जैसे मेला की समाप्ति का समय नजदीक आ रहा है दर्शनार्थियों का हुजूम उमड़ रहा है। पारिवारिक लोगों के समानांतर नवयुगलों की जोड़ी झुंड के झुंड करुणामयी की ओर खिंचे चले आ रहे हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखी है। पुलिस अधिकारी और मेला के आयोजक मारवाड़ी संस्कृति मंच के स्वयंसेवक प्रवेश द्वार पर एकत्रित हो रही भीड़ को संभालने में अस्त-व्यस्त हो रहे हैं। पूरी मुस्तैदी से अनुशासन को बनाए रखने के लिए सभी जी-जान से जुटे हैं।
राजस्थान, हरियाणा और शस्य-श्यामला बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाने वाला यह मेला सांस्कृतिक विरासत का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।
आधारभूत संरचना, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, विद्युत आपूर्ति और दर्शकों की सुविधा के परिणामस्वरूप हजारों की संख्या में पहुंच रहे दर्शक बिना किसी अव्यवस्था के सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोक नृत्य-संगीत, हस्तशिल्प एवं पारंपरिक व्यंजनों का आनंद ले पा रहे हैं।
विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल के कारण मेला परिसर में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था देखने को नहीं मिली। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान दर्शकों की भारी भीड़ के बावजूद अनुशासन और आंतरिकता सराहनीय रही है। लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत, रंगारंग मंचीय प्रस्तुतियों और हस्तशिल्प स्टॉलों ने मेले को जीवंत बना दिया है।
मरूधर मेला के माध्यम से न केवल लोक कलाओं और परंपराओं को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि छोटे उद्यमियों, कारीगरों और कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा और उत्पाद प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हुआ है । यह मेला पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक एकता को मजबूत करने में भी सफल रहा है।
आज भी मूल मंच से गीत-संगीत-नृत्य की त्रिवेणी प्रवाहित होती रही और उपस्थित दर्शक झूमते रहे। चोखी ढाणी में भोजन रसिकों की कतार पहले से अधिक रही।
मेला की भव्यता और सारगर्भिता को लेकर जब पत्रकारों ने दर्शनार्थियों से पूछा तो उनका जवाब था कि इतना विस्तृत, विविधतापूर्ण और बहुआयामी मेला आयोजित करना प्रशंसनीय कार्य है। परिवार और समाज को जोड़कर भविष्य की पीढ़ी के लिए आदर्शों की स्थापना दूरदर्शी सोच है जिसके संरक्षण और संवर्धन की जरूरत है।
आज मरूधर मेला में महानगर के औद्योगिक और सामाजिक क्षेत्र के नामचीन लोगों की उपस्थिति काबिल-ए-गौर रही जिनमें सज्जन बंसल, जयंती जैन(बबली भाई), श्रीकांत जैन, रमेश सरावगी, संजय बक्शी, स्मिता बक्शी, निर्मल सराफ, ओम जालान, अनिल खेमका आदि प्रमुख रहे।
मारवाड़ी संस्कृति मंच के संस्थापक अध्यक्ष ललित प्रहलादका एवं सचिव विकास पोद्दार के साथ पूरी कार्यकारिणी और पदाधिकारी तन्मयता से व्यवस्था को सुचारू रखने में तत्पर हैं।