कोलकाता : मुनि रविन्द्र विजय महाराज एवं मुनि महेन्द्र विजय महाराज के सान्निध्य में श्री वर्द्धमान जैन संघ में पर्यूषण महापर्व के तहत धार्मिक साधना और आराधना का दौर जारी है। इस अवसर पर श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर आत्मशुद्धि एवं संयम का संकल्प ले रहे हैं।
मुनि रविन्द्र विजय महाराज ने प्रवचन में कहा कि पर्यूषण जैन समाज का प्रमुख आध्यात्मिक पर्व है। इन दिनों कल्पसूत्र का वाचन-विवेचन, स्वाध्याय, पूजा-अर्चना, प्रतिक्रमण, सामायिक, त्याग, तपस्या एवं उपवास जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रावक-श्राविकाएं अधिक से अधिक समय धर्म साधना में लगाकर संयम और विवेक का पालन करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने बताया कि आठ दिवसीय पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन संवत्सरी पर्व मनाया जाता है। इस दिन वर्षभर में जाने-अनजाने हुई भूलों और कटु वचनों से किसी को पहुंची ठेस के लिए क्षमा मांगी जाती है तथा एक-दूसरे को क्षमा करते हुए ‘मिच्छामी दुक्कडम्’ कहा जाता है।
संघ के ट्रस्टी, चातुर्मास प्रबंध समिति एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने कार्यक्रमो को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।