कोलकाता : शहर में पिछले कुछ दिनों से वायरल संक्रमण के बाद लगातार गले में दर्द, खांसी, हल्का बुखार और आवाज बैठने की शिकायत वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टरों के मुताबिक, तापमान में लगातार बदलाव और नमी में उतार-चढ़ाव के बीच कई तरह के वायरस सक्रिय हैं, जिससे ऊपरी श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं।
वायरल के बाद भी हफ्तों तक रह सकती है खांसी और आवाज में बदलाव
डॉक्टरों के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं जिन्हें वायरल संक्रमण से ठीक होने के बाद भी गले में दर्द, निगलने में परेशानी, लगातार खांसी और आवाज में भारीपन की समस्या बनी हुई है। उन्होंने इसे पोस्ट-वायरल थ्रोट इंफेक्शन बताया।
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में गर्म पानी पीना, खांसी की लोजेंज लेना और तापमान में अचानक बदलाव से बचना मददगार हो सकता है। एसी कमरे से अचानक बाहर निकलने या लगातार तापमान बदलने से भी परेशानी बढ़ सकती है।
वर्तमान में कोलकाता में स्वाइन फ्लू, Influenza A और B तथा पैराइन्फ्लुएंजा जैसे वायरल संक्रमण भी देखे जा रहे हैं। इसके अलावा राइनोवायरस, मेटान्यूमोवायरस, रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस और एडेनोवायरस भी ऊपरी श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल संक्रमण के बाद होने वाली खांसी कई बार तीन से आठ सप्ताह तक बनी रह सकती है। संक्रमण खत्म होने के बाद भी श्वसन तंत्र की अंदरूनी परत में सूजन रहने के कारण खांसी और गले की परेशानी लंबे समय तक जारी रह सकती है।
वहीं कुछ मरीजों में बैक्टीरियल संक्रमण भी गले को प्रभावित कर रहा है, जिससे लैरिंजाइटिस और आवाज में बदलाव की समस्या हो रही है। वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होते, जबकि बैक्टीरियल संक्रमण में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ सकती है।