मणिपाल हॉस्पिटल की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अंशु सेन ने बताई इसकी भूमिका  
कोलकाता सिटी

संगीत की लय से संवर सकती है जिंदगी

न्यूरोलॉजिकल पुनर्वास में मिलेगी नई राह

Neha Singh

सन्मार्ग संवाददाता,

कोलकाता : डॉ. सेन ने बताया कि संगीत सुनने से मस्तिष्क के कई हिस्से सक्रिय होते हैं, जो सुनने, स्मृति, ध्यान, भावनाओं और शारीरिक गतिविधियों से जुड़े हैं। विशेष रूप से संगीत की लय मस्तिष्क को गतिविधियों के लिए बाहरी संकेत देती है। इससे मरीजों को नियमित और नियंत्रित तरीके से अभ्यास करने में सहायता मिल सकती है। मस्तिष्क की अनुभव और अभ्यास के आधार पर स्वयं को पुनर्गठित करने की क्षमता को न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है। पुनर्वास में संगीत इस प्रक्रिया के लिए एक संरचित और प्रेरक माध्यम बन सकता है।

**चलने और संतुलन सुधारने में सहायक**

पार्किंसन रोग के मरीजों को चलने की शुरुआत करने या एक समान गति बनाए रखने में परेशानी होती है। वहीं, स्ट्रोक के बाद मरीजों में शारीरिक कमजोरी, संतुलन और समन्वय की समस्या देखी जाती है। ऐसे में संगीत की नियमित ताल पर चलने का अभ्यास कदमों की गति और उनके बीच तालमेल सुधारने में सहायक हो सकता है।

संगीत की ताल पर हाथों से थाप देना या वाद्ययंत्र बजाना भी हाथों और बांहों की नियंत्रित गतिविधियों के अभ्यास का एक तरीका है। हालांकि, इन गतिविधियों को मरीज की शारीरिक क्षमता के अनुरूप और विशेषज्ञों की देखरेख में करना जरूरी है।

**बोलने और स्मृति के लिए भी उपयोगी**

स्ट्रोक के बाद कुछ मरीजों में अफेजिया की समस्या हो सकती है, जिसमें शब्दों को समझने या अपने विचार व्यक्त करने में कठिनाई होती है। ऐसे मरीजों के लिए मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी में संगीत और लय के माध्यम से शब्दों तथा वाक्यांशों का अभ्यास कराया जाता है। परिचित गीतों को गाना भी आवाज और बोलने के अभ्यास में मदद कर सकता है। हालांकि, इसे स्पीच थेरेपी का विकल्प नहीं माना जा सकता।

डॉ. सेन के अनुसार, परिचित धुनें कुछ मरीजों में पुरानी यादें ताजा कर सकती हैं तथा ध्यान, सामाजिक सहभागिता और भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा दे सकती हैं। पुनर्वास की लंबी प्रक्रिया में संगीत मरीजों को निराशा और थकान से उबरने तथा अभ्यास में रुचि बनाए रखने में मदद कर सकता है।

**व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार हो इस्तेमाल**

संगीत का चयन मरीज की पसंद, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और शारीरिक क्षमता के अनुरूप होना चाहिए। न्यूरोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट और प्रशिक्षित म्यूजिक थेरेपिस्ट मिलकर मरीज के लिए उपयुक्त गतिविधियां निर्धारित कर सकते हैं।

डॉ. सेन ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल पुनर्वास में संगीत को पारंपरिक चिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि एक पूरक माध्यम के रूप में देखना चाहिए। सही उपचार योजना में इसे शामिल करने से मरीजों को नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित किया जा सकता है और उनकी स्वतंत्रता तथा जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने की दिशा में मदद मिल सकती है।

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