श्री गुरु रामदास जी का 492वां प्रकाश पर्व 
कोलकाता सिटी

श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व

दो दिवसीय महान गुरमत समागम में विभिन्न समुदायों के लोगों ने लिया हिस्सा, गुरु का लंगर भी आयोजित

Ravi

कोलकाता : गुरुद्वारा बेहाला साहिब में सिखों के चौथे गुरु एवं अमृतसर के संस्थापक श्री गुरु रामदास जी का 492वां प्रकाश पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दो दिवसीय महान गुरमत समागम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सिख संगत के बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के अलावा सिंधी एवं बंगाली समुदाय के लोगों ने भी भाग लिया।

गुरबाणी कीर्तन और कथा से संगत हुई निहाल

समागम में दिल्ली स्थित गुरुद्वारा सीस गंज साहिब के हजूरी कथावाचक ज्ञानी अंग्रेज सिंह जी तथा हजूरी रागी भाई निर्मल सिंह जी खालसा ने गुरबाणी कीर्तन और कथा के माध्यम से संगत को निहाल किया।

गुरुद्वारा बेहाला साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी बलविंदर सिंह जी और हजूरी रागी भाई सुभाष सिंह जी ने भी आध्यात्मिक प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान गुरु रामदास जी के विनम्रता, समानता, करुणा, सेवा और भक्ति के संदेश को याद किया गया।

गुरु का लंगर और सेवा का संदेश

सिख परंपरा के अनुरूप दोनों दिन गुरु का लंगर आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक साथ प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन ने आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और मानव सेवा की भावना को मजबूत किया।

सरबत दा भला का लिया संकल्प

गुरुद्वारा बेहाला साहिब के महासचिव सतनाम सिंह अहलूवालिया ने कहा कि श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व हमें विनम्रता, निस्वार्थ सेवा, समानता और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों की सहभागिता गुरु साहिब के सार्वभौमिक प्रेम और सद्भाव के संदेश को दर्शाती है।

संगत ने सेवा, सिमरन और सरबत दा भला अर्थात समस्त मानवता के कल्याण के संकल्प को दोहराया। समागम का समापन विश्व शांति, समृद्धि, सांप्रदायिक सद्भाव और मानव कल्याण की अरदास के साथ हुआ।

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