स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन  
कोलकाता सिटी

कालीपूजा के नाम पर शाक्त परंपरा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : दीपक बर्मन

थीम आधारित पूजा और वैष्णव पद्धति से काली आराधना पर जताई आपत्ति

Paresnjitt

कोलकाता : राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने कालीपूजा में आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव, थीम आधारित आयोजनों और कुछ स्थानों पर वैष्णव पद्धति से मां काली की आराधना की जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कालीपूजा शाक्त परंपरा और तंत्र साधना का अभिन्न अंग है। आधुनिकता के नाम पर इसकी पारंपरिक पूजा-पद्धति में बदलाव करना शाक्त परंपरा के अनुरूप नहीं है। ''सन्मार्ग'' से बातचीत में स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि कृष्णानंद आगमवागीश, बामाखेपा, रामकृष्ण परमहंस और रामप्रसाद जैसे महान साधकों ने शाक्त मत के अनुरूप मां काली की आराधना की। उन्होंने दावा किया कि थीम आधारित पूजा के बढ़ते चलन से मां काली का पारंपरिक भयंकरी, रक्तवर्णा और तेजस्वी स्वरूप प्रभावित हो रहा है। उनके मुताबिक, मां के इस स्वरूप में निहित मातृभाव की विशिष्टता भी धीरे-धीरे पीछे छूट रही है। मंत्री ने दुर्गापूजा का उदाहरण देते हुए कहा कि थीम के अनावश्यक प्रयोग से जिस तरह उसका पारंपरिक स्वरूप प्रभावित हुआ, वैसी ही प्रवृत्ति अब कालीपूजा में भी दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के बीच शाक्त साधना, कालीकथा और कालीपूजा के इतिहास से जुड़ी सांस्कृतिक समझ विकसित करने पर विचार कर रहा है। उन्होंने राज्यवासियों को कालीपूजा की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।

बलि की परंपरा पर भी उठाए सवाल

कालीपूजा में बलि की परंपरा का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि रक्तपात रहित बलि के बिना मां काली की पूजा अधूरी है। उनके अनुसार, पहले पूजा में बलि देने का प्रचलन था, लेकिन अब बलि के नाम पर होने वाले प्रतीकात्मक अर्पण को वास्तविक बलि नहीं कहा जा सकता। उन्होंने शाक्त परंपरा के अनुरूप पूजा-पद्धति और धार्मिक मान्यताओं के संरक्षण पर जोर दिया।

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