कोलकाता : राज्य सरकार ने पहली से 12वीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों की व्यापक समीक्षा के लिए 'सिलेबस-कम-करिकुलम समिति' का गठन किया है। शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, समिति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020, नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क-2022 एवं 2023 तथा आधुनिक शिक्षा शास्त्र के अनुरूप नई सिफारिशें तैयार करेगी।
सरकार का उद्देश्य रटंत प्रणाली और नोट्स पर निर्भरता कम कर विद्यार्थियों में विषय की गहरी समझ, जिज्ञासा और तार्किक सोच विकसित करना है। समिति कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने, निजी ट्यूशन पर निर्भरता घटाने, ऑडियो-वीडियो आधारित वैज्ञानिक शिक्षण पद्धति को बढ़ावा देने तथा विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों सहित सभी छात्रों के लिए तनावमुक्त और समग्र मूल्यांकन प्रणाली की भी सिफारिश करेगी।
शिक्षकों के प्रशिक्षण में सुधार और विषय की गहराई से पढ़ाने की संस्कृति विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। समिति के अध्यक्ष कल्याणी विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान प्रोफेसर देवाशीष चट्टोपाध्याय होंगे। इसे पहली बैठक के दो माह के भीतर अंतरिम और तीन माह के भीतर अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। माना जा रहा है कि जनवरी 2027 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से संशोधित पाठ्यक्रम लागू किया जा सकता है।