कोलकाता : राज्य सरकार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती को पूरे राज्य में वर्षव्यापी समारोह के रूप में मनाने का फैसला किया है। जिलों, शैक्षणिक संस्थानों और सांस्कृतिक मंचों पर उनके जीवन और योगदान को याद करने की तैयारियां चल रही हैं लेकिन इसी बीच बंगाल विधानसभा की लॉबी का एक शांत कोना एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है। वहां टंगी डॉ. मुखर्जी का एक दुर्लभ और ऐतिहासिक तैलचित्र स्वयं संरक्षण की प्रतीक्षा में है।
सुनहरे फ्रेम में सजी यह जीवन-आकार (लाइफ-साइज) पेंटिंग अब धूल, नमी और समय की मार से अपनी चमक खो चुकी है। इसके रंग काले और धुंधले पड़ गए हैं, चेहरे की रेखाएं मद्धिम हो गई हैं और कैनवास के किनारे फटने लगे हैं। ऐसा लगता है मानो इतिहास का यह चेहरा धीरे-धीरे अंधेरे में खोता जा रहा है।
यह कोई साधारण चित्र नहीं है। इसे प्रख्यात चित्रकार और संगीत नाटक अकादमी द्वारा सम्मानित रणेन अयन दत्त ने वर्ष 1956 में बनाया था। खास बात यह है कि इस चित्र की रूपरेखा 1950 के दशक की शुरुआत में तैयार की गई थी, जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्वयं जीवित थे। जम्मू-कश्मीर में पुलिस हिरासत में उनकी रहस्यमय मृत्यु के तीन वर्ष बाद इस चित्र को अंतिम रूप दिया गया। इस लिहाज से यह केवल एक पेंटिंग्स नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय इतिहास का एक जीवंत दस्तावेज है।
विडंबना यह है कि पिछले सात दशकों में इस अमूल्य कलाकृति का एक बार भी पुनर्स्थापन (रेस्टोरेशन) नहीं हुआ। विधानसभा की दीवारों पर टंगी यह तस्वीर वर्षों से नेताओं, मंत्रियों और आगंतुकों को देखती रही, लेकिन इसकी बिगड़ती हालत पर शायद ही किसी की नजर पड़ी।
विधानसभा के उप-क्यूरेटर कालीपद मुर्मू बताते हैं कि विधानसभा में बंगाल और भारत की विभूतियों के सौ से अधिक दुर्लभ चित्र सुरक्षित हैं और श्यामा प्रसाद मुखर्जी का यह चित्र उनमें से एक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संरक्षण कार्य के लिए धन आवंटित किया है, लेकिन आधुनिक रेस्टोरेशन प्रक्रिया काफी महंगी है। मुर्मू ने आश्वासन दिया कि वह इस विषय को जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाएंगे और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।