जस्टिस बागची ने खुद को अलग किया पुलिस अफसर के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए
जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : नंदीग्राम से कांग्रेसी उम्मीदवार मिलन प्रधान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएएलपी पर सुनवाई सोमवार को टल गई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहाना के बेंच में यह सुनवाई होनी थी। जस्टिस बागची ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। इस वजह से सुनवाई नहीं हो पाई। अब यह सुनवाई सात अक्टूबर को होगी। जस्टिस बागची ने खुद को हितों का टकराव का हवाला देते हुए अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि अपनी प्रैक्टिस के दिनों में प्रधान से जुड़े कुछ दलों के मामले में उन्होंने पैरवी की थी। राज्य सरकार की तरफ से बहस कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार को ही सुनवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मंगलवार को ही चुनाव होना है और बुधवार को सुनवाई होती है तो यह मामला निरर्थक हो जाएगा। एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि चीफ जस्टिस ने इससे इनकार कर दिया। बेंच ने कहा कि चुनाव लड़ने दीजिए बुधवार को सुनवाई करेंगे। तुषार मेहता ने कहा कि मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 में वारंट जारी किया गया था लेकिन उसे पर अमल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि उसे प्रशासन की सुरक्षा मिली हुई थी और नामांकन दाखिल करते समय यह मामला जानकारी में आया। इसके जवाब में चीफ जस्टिस ने कहा कि तो इससे जुड़े पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सिस्टम की एक जिम्मेदारी होती है। जब कोई चुनाव लड़ने जाता है तो अचानक वारंट सामने आ जाते हैं। प्रधान की तरफ से बहस कर रहे एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्य ने इरादतन यह कार्रवाई की है। चीफ जस्टिस ने कहा कि उसे मतदान और मतगणना में शामिल होने दीजिए।