रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सुंदरवन से उत्साहजनक खबर सामने आई है। लगभग एक दशक बाद सुंदरवन के जंगल में फिर से मेलानिस्टिक (जीनगत कारणों से काले रंग की) लेपर्ड कैट की तस्वीर कैमरा ट्रैप में कैद हुई है। वैज्ञानिक समुदाय में इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। दिसंबर 2024 का अंत खुशखबरी के साथ हुआ था, जब ओडिशा के सिमलीपाल से बाघिन जीनत को सफलतापूर्वक उसके घर लौटाया गया। उसी तरह दिसंबर 2025 का अंत भी राज्य वन विभाग के लिए ‘हैपी नोट’ लेकर आया। नवंबर 2024 के अंत में सुंदरवन बायोस्फियर रिज़र्व क्षेत्र में राष्ट्रीय बाघ गणना के दौरान लगाए गए कैमरों में इस दुर्लभ प्रजाति की तस्वीर कैद हुई है।इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में शामिल लेपर्ड कैट सुंदरवन के पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। हालांकि, भारत के सुंदरवन क्षेत्र में मेलानिस्टिक लेपर्ड कैट की प्रमाणिक तस्वीरें बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं। इससे पहले फरवरी 2012 में पहली बार यह प्रजाति कैमरे में कैद हुई थी। उसके बाद लगभग 12 वर्षों तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला। यह नई खोज राजेंद्र जाखड़, जस्टिन जोन्स और देवज्योति घोष के शोध के जरिए सामने आई है, जिसे कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस ने प्रकाशित किया है। संयोग से राजेंद्र जाखड़ वर्तमान में सुंदरवन टाइगर रिज़र्व के फील्ड डायरेक्टर हैं और जस्टिन जोन्स उनके डिप्टी। शोधकर्ताओं के अनुसार, फिलहाल सुंदरवन के कम से कम छह स्थानों पर इस प्रजाति की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। दक्षिण 24 परगना डिविजन के रायदीघी रेंज के धुलीभासानी, हेरोभांगा और अजमलमारी इलाकों में इसकी तस्वीरें सामने आई हैं। इनमें से हेरोभांगा मानव बस्ती से मात्र 250 मीटर दूर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि लेपर्ड कैट शर्मीली और निशाचर होती है, इसलिए इसका दिखना आसान नहीं है। फिर भी इस खोज से उम्मीद जगी है कि सुंदरवन में इनकी संख्या कम नहीं होगी। भविष्य में इस पर और गहन अध्ययन किया जाएगा।