कोलकाता सिटी

बीएलसी प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुरक्षा, बीमा और बैन पीरियड में आर्थिक सहायता की मांग

Rambalak

दक्षिण 24 परगना: सुंदरवन के पारंपरिक एवं वास्तविक मछुआरों की समस्याओं को लेकर टीयूसीसी समर्थित पश्चिम बंगाल मछुआरा यूनियन ने सरकार के समक्ष आठ सूत्रीय मांगें रखी हैं। कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में टीयूसीसी के राष्ट्रीय महामंत्री शिव कुमार तिवारी ने प्रदेश महामंत्री अम्बिया हुसैन और दक्षिण 24 परगना जिला समिति के सचिव सुकांत सरकार की मौजूदगी में मछुआरों की समस्याओं को उठाया। शिव कुमार तिवारी ने कहा कि प्रतिकूल प्राकृतिक परिस्थितियों, नदी-समुद्र की उफनती जलधारा और लगातार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के बीच सुंदरवन के मछुआरे जोखिम उठाकर अपनी आजीविका चलाते हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मछुआरे अपने अधिकारों और आवश्यक सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। यूनियन ने BLC प्रक्रिया में पारदर्शिता, BLC रद्द करने की कार्रवाई पर रोक तथा Mutation प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग की। 14 BLC धारकों को जारी कारण बताओ नोटिस के मामलों में सुनवाई पूरी होने तक BLC को अन्य व्यक्तियों के नाम हस्तांतरित नहीं करने की मांग भी की गई। इसके अलावा बाघ और मगरमच्छ के हमलों में मृत या घायल मछुआरों के परिवारों को उचित मुआवजा एवं स्थायी रोजगार, विशेष जीवन एवं दुर्घटना बीमा, GPS तथा आधुनिक संचार व्यवस्था की मांग की गई। यूनियन ने बैन पीरियड के दौरान मछुआरा परिवारों को ₹25,000 मासिक आर्थिक सहायता, पर्याप्त राशन, सुरक्षित मछली पकड़ने का अधिकार, Digital Fishermen Card, शिक्षा एवं चिकित्सा सुविधाएं तथा Fishermen Welfare Board के गठन की मांग की। यूनियन ने कहा कि सुंदरवन के पर्यावरण एवं जैव-विविधता के संरक्षण के साथ मछुआरों की आजीविका, अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

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