कोलकाता : बार-बार आरोप लगाए जाते रहे हैं कि पिछली सरकार के दौरान जमीन से जुड़े मामलों में कामकाज अटक गया था। अब सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों में जल्द ही कांटेदार तार लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जमीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में गुरुवार को भूमि विभाग में एक अहम बैठक हुई, जिसमें सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों ने भी भाग लिया।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, विभागीय सचिव वंदना यादव सहित भूमि एवं भूमि राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में जमीन हस्तांतरण के लिए तीन तरीकों पर सहमति बनी है— निजी जमीन को सरकार खरीदकर बीएसएफ को सौंपा जाएगा, अतिक्रमित सरकारी जमीन को मुक्त कर उपयोग में लाया जाएगा, और विभिन्न सरकारी विभागों की सीमावर्ती जमीन को कानूनी प्रक्रिया के तहत अधिग्रहित कर बीएसएफ को दिया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी के निर्देश के बाद इस पूरी प्रक्रिया को 45 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कानूनी अड़चनों को तेजी से कैसे दूर किया जाए, ताकि काम में देरी न हो। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने संकेत दिया था कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर कांटेदार तार लगाने के लिए आवश्यक जमीन तय समय सीमा में बीएसएफ को उपलब्ध कराई जाएगी।