बारुईपुर: जीवनतला थाना क्षेत्र के माकालतला इलाके में रहने वाली एक वृद्धा की मौत के बाद उसके परिजनों ने एसआईआर प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया है। मृतका का नाम गौरी बेरा (65) था। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से एसआईआर को लेकर वह गहरे डर और मानसिक तनाव में जी रही थीं, जिसका असर उनकी सेहत पर पड़ा और शनिवार रात सोते समय उनकी मौत हो गई। गौरी बेरा का मूल घर कूचबिहार जिले में था। कई वर्ष पहले वह रोजगार की तलाश में दक्षिण 24 परगना के घुटियारी शरीफ अंतर्गत माकालतला इलाके में आकर रहने लगी थीं। यहां वह एक किराए के मकान में रहती थीं। पहले उनका बेटा भी उनके साथ रहता था, लेकिन बाद में वह उन्हें छोड़कर कहीं और चला गया। इसके बाद से गौरी अकेले ही जीवन यापन कर रही थीं। वे कोलकाता में घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं और पिछले दस वर्षों से अधिक समय से उसी मकान में रह रही थीं। परिजनों और पड़ोसियों के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से गौरी पूरी तरह टूट गई थीं। उन्होंने स्थानीय लोगों से कई बार कहा था कि उनके पास वोटर कार्ड नहीं है और मतदाता सूची में भी उनका नाम दर्ज नहीं है। उन्हें इस बात का डर सताने लगा था कि पुलिस उन्हें पकड़कर ले जाएगी या घर से निकाल दिया जाएगा। परिवार के अन्य सदस्यों से संपर्क न होने के कारण वह आवश्यक दस्तावेज जुटाकर वोटर सूची में नाम दर्ज नहीं करा पाईं। पिछले कुछ दिनों से वह वोटर कार्ड, आधार कार्ड और अन्य सरकारी कागजात बनवाने के लिए लगातार दौड़भाग कर रही थीं। मकान मालिक ने उन्हें बार-बार भरोसा दिलाया कि डरने की कोई बात नहीं है, लेकिन गौरी का भय कम नहीं हुआ। अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी और वे बीमार रहने लगी थीं। शनिवार रात उन्होंने खाना खाया और सो गईं। सुबह जब काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसियों ने अंदर जाकर देखा, जहां वह मृत पाई गईं। इस घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर उचित मार्गदर्शन और सहायता मिलती, तो शायद गौरी बेरा की जान बचाई जा सकती थी।