फाइल फोटो 
कोलकाता सिटी

सुशांत घोष ने 950 लोगों से की थी 3 करोड़ रुपये की वसूली!

अदालत में सरकारी वकील ने किया दावा, कोर्ट ने 28 जून तक पुलिस हिरासत में भेजा

कोलकाता : कसबा से पूर्व पार्षद सुशांत घोष की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। जबरन वसूली और धोखाधड़ी के चार अलग-अलग मामलों का सामना कर रहे घोष पर आनंदपुर और कसबा इलाके के करीब 950 हॉकरों से 3 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप लगा है। ताजा मामला विगत 15 जून को दर्ज किया गया था। कोलकाता पुलिस की एंटी-फ्रॉड सेक्शन ने विगत सोमवार को सुशांत घोष को पुरी के पास पिपली से गिरफ्तार किया था। गुरुवार को उसे अलीपुर अदालत में पेश किया गया, जहां से 28 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। अदालत में पुलिस ने खुलासा किया कि घोष हॉकरों को निशाना बनाने वाले एक सुनियोजित और बड़े रैकेट का नेतृत्व कर रहे थे, जिसे बेहद शातिराना तरीके से एक 'कोऑपरेटिव स्कीम' (चिटफंड मॉडल) की तरह चलाया जा रहा था।

फुटपाथ सौंदर्यीकरण के नाम पर 'वसूली का खेल'

सरकारी वकील सौरिन घोषाल ने अदालत को बताया कि इस पूरे रैकेट को फुटपाथ सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास अभियान की आड़ में अंजाम दिया गया। योजना के तहत पहले गरीब और असहाय हॉकरों को उनके व्यापारिक स्थानों से बेदखल किया गया। हॉकरों को जाल में फंसाने के लिए आरोपियों ने रेकरिंग चिटफंड की तर्ज पर एक समानांतर कलेक्शन सिस्टम शुरू किया। पुलिस के अनुसार, फुटपाथ पर दोबारा दुकान लगाने की अनुमति के एवज में सिंडिकेट ने प्रत्येक हॉकर से 50,000 से 70,000 रुपये तक की ‘क्लियरेंस फीस’ वसूली। इसके बाद, फुटपाथ पर नवनिर्मित टीन के स्टालों को उन्हीं हॉकरों को 5 लाख से 8 लाख रुपये की भारी-भरकम कीमत पर वापस बेच दिया गया।

फर्जी सरकारी दस्तावेज और गुप्त बहीखाता बरामद

इस जबरन वसूली को कानूनी रूप देने के लिए सिंडिकेट ने फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार किए थे, ताकि हॉकरों को लगे कि यह कार्रवाई सक्षम प्राधिकारियों के निर्देश पर हो रही है। जांच अधिकारी ने बताया, ‘17 जून को आरोपी के ठिकानों पर की गई छापेमारी में कई लेजर बुक्स बरामद हुए हैं। इनमें हॉकरों से की गई व्यवस्थित वसूली और सिंडिकेट के सदस्यों के बीच पैसों के बंटवारे का पूरा विवरण दर्ज है। इसके अलावा, बैंक खातों की जांच में भी कई संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।


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