बोलपुर : विश्वभारती विश्वविद्यालय ने शांतिनिकेतन परिसर के सबसे पुराने भवनों में शामिल ‘शांतिनिकेतन गृह’ को छह साल से अधिक समय बाद एक बार फिर पर्यटकों के लिए खोल दिया है। लंबे समय से बंद इस ऐतिहासिक इमारत को अब विश्वविद्यालय की ओर से कराई जाने वाली हेरिटेज वॉक के समापन पर देखा जा सकेगा।
इससे शांतिनिकेतन आने वाले पर्यटकों को परिसर के इतिहास और विरासत से जुड़े एक महत्वपूर्ण स्थल को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
विश्वभारती की ओर से आयोजित निर्देशित हेरिटेज वॉक के दौरान पर्यटकों को शांतिनिकेतन के ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी दी जाती है। अब इस यात्रा के अंतिम पड़ाव के तौर पर शांतिनिकेतन गृह को भी शामिल किया गया है।
छह साल से अधिक समय तक पर्यटकों की पहुंच से दूर रहने के बाद भवन को फिर खोलने से विश्वविद्यालय की विरासत को लोगों के सामने लाने की कोशिश को बढ़ावा मिलेगा।
विश्वभारती ने पर्यटकों के लिए आगे एक और बड़ी योजना बनाई है। विश्वविद्यालय के मुताबिक पूजा की छुट्टियों के बाद उत्तरायण परिसर में स्थित रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़े पांच ऐतिहासिक घरों को भी फिर से खोले जाने की तैयारी है।
इनमें उदययन, श्यामली, पुनश्च, कोणार्क और उदिची शामिल हैं। इन भवनों का टैगोर और शांतिनिकेतन की सांस्कृतिक विरासत से गहरा संबंध रहा है।
शांतिनिकेतन को उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। ऐसे में लंबे समय से बंद ऐतिहासिक भवनों को चरणबद्ध तरीके से पर्यटकों के लिए उपलब्ध कराने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शांतिनिकेतन गृह के दोबारा खुलने के बाद अब पर्यटकों की निगाहें उत्तरायण परिसर के पांचों भवनों पर रहेंगी। पूजा के बाद इनके खुलने से शांतिनिकेतन आने वाले लोगों को रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़ी विरासत को और विस्तार से देखने का अवसर मिलने की उम्मीद है।