कोलकाता : जमीन कारोबार में अवैध दखल, पुलिस अधिकारियों के तबादले में कथित भूमिका और करोड़ों रुपये के आर्थिक भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार कोलकाता पुलिस के अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत में कई गंभीर आरोप लगाए। ईडी के वकील ने अदालत में कहा, ‘यह कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन सब सच है। चार्जशीट दाखिल होने पर यही सच्चाई साबित होगी।’
हालांकि शांतनु सिन्हा विश्वास ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि वह पैतृक रूप से संपन्न परिवार से आते हैं और उन पर लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अभियुक्त को 28 मई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
व्हाट्सऐप चैट और बैंक खातों से मिले सबूत
ईडी के अनुसार, जय कामदार के व्हाट्सऐप चैट और बैंक खातों की जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि शांतनु सिन्हा विश्वास कोलकाता पुलिस में उच्च पद पर कार्यरत थे और पुलिस वेलफेयर ऑफिस से भी जुड़े हुए थे। वह ‘पैन बंगाल पुलिस’ के वेलफेयर नोडल अधिकारी भी रह चुके हैं। ईडी का मानना है कि इसी पद का फायदा उठाकर उन्होंने अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ नेटवर्क तैयार किया।
आरोप है कि प्रमोटर जय कामदार और राजनीतिक रसूखदारों के साथ मिलकर शांतनु सिन्हा कीमती संपत्तियों को चिह्नित करते थे। इसके बाद पुलिसिया धौंस का इस्तेमाल कर मालिकों को औने-पौने दाम पर जमीन बेचने के लिए मजबूर किया जाता था। ईडी के अनुसार, जहां पुलिस का दबाव काम नहीं करता था, वहां कुख्यात अपराधी सोना पप्पू और उसके गिरोह का इस्तेमाल कर मालिकों को जान से मारने की धमकी दी जाती थी। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि एक तथाकथित 'वेलफेयर कमेटी' के जरिए शांतनु पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को नियंत्रित करते थे और इसके बदले करोड़ों की वसूली की जाती थी। शांतनु पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव से बेटे को एक विश्वविद्यालय में डीन नियुक्त कराया। जांच में सामने आया कि उनके बेटे के खाते में एकमुश्त 21 लाख रुपये जमा हुए और 'सन कंस्ट्रक्शन' में उनके परिवार के नाम पर दो लग्जरी फ्लैट बुक किए गए। आरोप है कि जय कामदार ने शांतनु को एक करोड़ रुपये से अधिक कीमत की रिस्टवॉच गिफ्ट में दी थी। ईडी ने अदालत का ध्यान इस बात पर भी आकर्षित किया कि सेवानिवृत्ति के बावजूद तत्कालीन सरकार ने शांतनु सिन्हा को बार-बार 'सेवा विस्तार' दिया। वे वर्षों तक अति-संवेदनशील कालीघाट थाने में पदस्थ रहे। व्हाट्सएप चैट के जरिए यह भी खुलासा हुआ है कि वे जय कामदार के साथ मिलकर लगातार उगाही की नयी योजनाएं बनाते थे। ईडी ने अदालत में कहा, ‘यदि सिंडिकेट को पैसा नहीं दिया जाता था तो एक सफाईकर्मी तक काम शुरू नहीं कर सकता था।’
बचाव पक्ष का पलटवार
शांतनु सिन्हा के अधिवक्ता साबिर अहमद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘ईडी अदालत में केवल काल्पनिक कहानियां सुना रहा है, जिनके पीछे कोई ठोस सबूत नहीं है। मेरे मुवक्किल के पास जो भी संपत्ति है, वह उन्हें विरासत में मिली है। जहां तक उपहारों की बात है, वे एक पारिवारिक समारोह के दौरान मिले थे, जिसका भ्रष्टाचार से कोई लेना-देना नहीं है।’ बचाव पक्ष ने दावा किया कि शांतनु अपराधी सोना पप्पू को नहीं जानते और वे हमेशा जांच में सहयोग करते रहे हैं। उन्होंने अदालत से किसी भी शर्त पर जमानत देने की अपील की।