कोलकाता : किसी व्यक्ति का धूम्रपान करना केवल उसकी सेहत के लिए ही नुकसानदेह नहीं है, बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोगों को भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। एक अध्ययन ने भारत में सेकेंड-हैंड स्मोक के बढ़ते स्वास्थ्य बोझ को सामने रखा है।
अध्ययन के अनुसार 2023 में भारत में करीब 3.25 लाख मौतें पैसिव स्मोकिंग से जुड़ी बीमारियों के कारण हुईं, जबकि 1990 में यह संख्या करीब 2.18 लाख थी। देश में लगभग 44.4 करोड़ लोग दूसरे के तंबाकू के धुएं के संपर्क में आए।
कोलकाता के आंकड़े बढ़ाते हैं चिंता
कोलकाता और पश्चिम बंगाल की स्थिति को देखें तो यहाँ की तस्वीर भी चिंताजनक है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक कोलकाता में धूम्रपान करने वालों का अनुपात देश के महानगरों में सबसे अधिक बताया गया है। यहां करीब 56.6 फीसदी आबादी धूम्रपान करती है, जिसमें पुरुषों का अनुपात 82 फीसदी और महिलाओं का 23.5 फीसदी है।
जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल में 15 वर्ष से अधिक उम्र के 48.1 फीसदी पुरुष और 10.8 फीसदी महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं।
घर से लेकर सार्वजनिक स्थानों तक खतरा
2016-17 के आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में 22.5 फीसदी वयस्क सार्वजनिक स्थानों पर पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आए थे। इसके अलावा राज्य में पैसिव स्मोकिंग का बड़ा हिस्सा घरों के भीतर भी होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक तंबाकू के धुएं के संपर्क में रहने से हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर, COPD और अस्थमा जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए इसका खतरा विशेष रूप से गंभीर माना जाता है।
ऐसे में कोलकाता में घर, कार्यालय, सार्वजनिक परिवहन और बाजार जैसे स्थानों पर धूम्रपान से दूरी बनाना जरूरी है। आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि सिगरेट का धुआं सिर्फ पीने वाले तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास के लोगों की सेहत की भी कीमत वसूलता है।