कोलकाता : मणिपाल हॉस्पिटल EM बाइपास के मणिपाल कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर केयर सेंटर की ओर से कैंसर से जूझ चुके मरीजों के सम्मान में ‘Warriors of Life’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इम्यूनोथेरेपी से उपचार प्राप्त कर रहे और उपचार पूरा कर चुके मरीजों ने अपनी जीवन यात्रा साझा की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कैंसर के उपचार से आगे बढ़कर मरीजों के आत्मविश्वास, भावनात्मक स्वास्थ्य, पारिवारिक सहयोग और सामान्य जीवन की ओर वापसी को रेखांकित करना था।
इस अवसर पर ‘Are We Close to a Cure for Cancer? Is Immunotherapy the Future?’ विषय पर पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें चिकित्सकों और मरीजों ने उपचार के बदलते स्वरूप पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम में डॉ. सुदीप दास, HOD एवं सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी; डॉ. प्रदीप कुमार मंडल, सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी; डॉ. तन्मय बनर्जी, डायरेक्टर, क्रिटिकल केयर मेडिसिन; डॉ. देबदीप सामद्दार, एसोसिएट कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी तथा सेवानिवृत्त प्रो. डॉ. कल्याण भट्टाचार्य उपस्थित रहे।
डॉ. सुदीप दास ने कहा कि इम्यूनोथेरेपी ने कैंसर उपचार के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। हालांकि यह हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है और इसका निर्णय कैंसर के प्रकार, अवस्था, बायोमार्कर तथा मरीज की चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर किया जाता है।
डॉ. प्रदीप कुमार मंडल ने कैंसर उपचार में व्यक्तिगत चिकित्सा पद्धति के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। वहीं डॉ. तन्मय बनर्जी ने कुछ फेफड़ों के कैंसर में इम्यूनोथेरेपी की भूमिका और मरीजों की उचित निगरानी को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में खड़गपुर के 60 वर्षीय कैंसर सर्वाइवर सौरव मटिया और 40 वर्षीय गारफील्ड जूड पेम्ब्रो ने अपने उपचार और जीवन में लौटने के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि कैंसर के बाद भी मरीज उम्मीद, परिवार और रोजमर्रा की जिंदगी के साथ आगे बढ़ सकते हैं।