लिफ्ट क्लीयरेंस का इंतजार करती SDF बिल्डिंग 
कोलकाता सिटी

2012 से अग्नि सुरक्षा और लिफ्ट क्लीयरेंस का इंतजार कर रही साल्टलेक की SDF बिल्डिंग

1,000 से अधिक कर्मचारी करते हैं काम

Ravi

कोलकाता : साल्टलेक के सेक्टर-V स्थित SDF बिल्डिंग में अग्नि सुरक्षा और लिफ्ट संचालन से संबंधित मंजूरी का मामला वर्ष 2012 से लंबित है। राज्य सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी Webel की इस छह मंजिला इमारत में करीब 150 आईटी और आईटी-सक्षम सेवा (ITeS) कंपनियां संचालित हैं, जहां 1,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।

इतने लंबे समय से आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण भवन की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अग्निशमन विभाग से एनओसी अब तक लंबित

SDF बिल्डिंग के प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त करने की प्रक्रिया वर्ष 2012 से लंबित है। इस दौरान विभाग के अधिकारियों ने कई बार भवन का निरीक्षण किया और आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए।

अधिकारी का दावा है कि प्रबंधन ने इन निर्देशों का पालन किया है और विभाग की ओर से सिफारिशें भी मिली हैं, लेकिन एनओसी अब तक जारी नहीं हुई है। भवन प्रबंधन का कहना है कि इमारत में आग से बचाव के लिए हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर, आग का पता लगाने वाले उपकरण और अलार्म सिस्टम लगाए गए हैं।

प्रबंधन ने अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करने का भी दावा किया है। हालांकि, इन व्यवस्थाओं के बावजूद औपचारिक मंजूरी नहीं मिलने का मामला चर्चा में है।

चार लिफ्टों के सुरक्षा प्रमाणपत्र का मामला भी अटका

SDF बिल्डिंग में चार लिफ्ट हैं, लेकिन इनके लिए भी आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र अब तक नहीं मिला है। भवन प्रबंधन से जुड़े एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग (PWD) के विद्युत विभाग से लिफ्ट सुरक्षा मंजूरी का मामला भी 2012 से लंबित है। अधिकारी ने उम्मीद जताई कि प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी।

इस मामले पर राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी सचिव ने टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने पर Webel से बात करने को कहा।

2019 में आग लगने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे थे सवाल

SDF बिल्डिंग में जनवरी 2019 में आग लगने की घटना भी सामने आई थी। इमारत के पूर्वी हिस्से की दूसरी मंजिल पर आग लगने के बाद उस समय मौजूद करीब 500 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। जानकारी के अनुसार, उस दौरान फायर अलार्म सक्रिय नहीं हुआ था। इस घटना ने भवन की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

वर्ष 1988 में राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित इस इमारत ने बाद में आईटी कंपनियों के लिए कार्यस्थल और शुरुआती कारोबार के लिए केंद्र का रूप ले लिया। फिलहाल यहां बड़ी संख्या में आईटी कंपनियां किराये या दीर्घकालीन लीज पर जगह लेकर काम कर रही हैं।

ऐसे में भवन प्रबंधन और संबंधित विभागों के सामने अग्नि सुरक्षा तथा लिफ्टों की औपचारिक मंजूरी से जुड़ी प्रक्रिया को जल्द पूरा करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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