कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा की महत्वपूर्ण बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) के पुनर्गठन ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। नवगठित कमेटी में ममतापंथी विधायकों को पूरी तरह बाहर रखा गया है, जबकि ऋतब्रत बंद्योपाध्याय समर्थक नेताओं को प्रमुख स्थान मिला है।
इसके साथ ही वाम दलों, कांग्रेस और आईएसएफ के प्रतिनिधियों को भी कमेटी में शामिल किया गया है। विधानसभा की कार्यवाही, सत्र की अवधि, विधेयकों पर चर्चा और उनके पारित होने की समय-सारिणी तय करने वाली यह कमेटी सदन की सबसे प्रभावशाली समितियों में मानी जाती है। ऐसे में ममता गुट के नेताओं की अनुपस्थिति को बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
19 सदस्यीय इस कमेटी में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय, विपक्ष के मुख्य सचेतक अखरुज्जमां और सरकारी मुख्य सचेतक अम्लान भादुड़ी शामिल हैं। इसके अलावा निशीथ प्रमाणिक, दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, तापस राय, स्वपन दासगुप्ता और शारद्वत मुखोपाध्याय जैसे वरिष्ठ मंत्रिओं को भी कमेटी का सदस्य बनाया गया है।
ऋतब्रत के करीबी माने जाने वाले बिप्लब मित्र और समीर कुमार जाना को भी कमेटी में जगह मिली है। आमंत्रित सदस्यों में आईएसएफ के नौशाद सिद्दीकी, कांग्रेस के मोहताब शेख और माकपा के मोहम्मद मोस्ताफिजुर रहमान शामिल हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव विधानसभा के भीतर बदलते शक्ति संतुलन का संकेत है और आगामी सत्र में इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।