कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी अंतरकलह अब पार्टी के पुराने केंद्रीय कार्यालय तक पहुंच गया है। शुक्रवार की शाम ईएम बाईपास स्थित तृणमूल भवन पर ऋतब्रत बंद्योपाध्याय समर्थक गुट ने पहुंचकर कार्यालय पर अपना दावा जताया। गेट पर दो नए ताले लगा दिए गए और नया बैनर लगाया गया, जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की तस्वीर नहीं थी। बैनर में केवल चेयरमैन के रूप में अरूप राय का नाम दर्ज था।
ऋतब्रत गुट के नेता अखरुज्जमां ने दावा किया कि भवन मालिक के साथ नया समझौता हो चुका है और अब कार्यालय की चाबी उनके पास रहेगी। उन्होंने कहा कि शनिवार से यहीं से संगठन का कामकाज शुरू होगा। घटना की जानकारी मिलते ही तृणमूल के विधायक कुणाल घोष, मदन मित्रा, वैश्वानर चटर्जी, उपासना चौधरी और अन्य नेता मौके पर तुरंत पहुंचे, लेकिन मुख्य गेट पर ताला लगे होने के कारण वे अंदर नहीं जा सके।
कुणाल घोष ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पुलिस के अनुरोध पर ताला नहीं तोड़ा गया। उन्होंने दावा किया कि भवन का किराया समझौता 2027 तक वैध है और मामले में कानूनी कदम उठाए जाएंगे। प्रगति मैदान थाने की पुलिस और केंद्रीय बलों ने पूरे परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी, हालांकि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
कुणाल घोष ने कहा, "यह तृणमूल कांग्रेस का कार्यालय है। जो लोग यहां आए हैं, वे भी ममता बनर्जी के चुनाव चिह्न पर ही निर्वाचित हुए हैं। उनकी इस कार्रवाई से पार्टी कार्यकर्ता आहत और नाराज हैं।" पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण की लड़ाई के बीच अब तृणमूल भवन भी सियासी टकराव का नया केंद्र बन गया है।