कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मानसून की सक्रियता के साथ डेंगू का खतरा भी बढ़ने लगा है। बारिश और जलजमाव के कारण मच्छरों के प्रजनन की अनुकूल परिस्थितियां बनने से स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के पांच जिलों को डेंगू के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किया है।
इनमें कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद शामिल हैं। इन जिलों में पिछले कुछ समय में सामने आए डेंगू के मामलों को देखते हुए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
जलजमाव वाले इलाकों पर विशेष नजर
स्वास्थ्य विभाग ने मानसून के दौरान संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखने के साथ मच्छरों के लार्वा की तलाश और उन्हें नष्ट करने का अभियान तेज करने को कहा है। बारिश के बाद विभिन्न इलाकों में जमा पानी एडीज मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है।
ऐसे में नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन को नियमित रूप से संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण करने तथा पानी जमा होने वाले स्थानों की सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाने और संदिग्ध मरीजों की पहचान करने से डेंगू के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है।
इसके लिए अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच और मामलों की रिपोर्टिंग में सतर्कता बरतने को कहा गया है।
डेंगू के साथ मलेरिया की चुनौती
राज्य के सामने डेंगू के साथ मलेरिया की भी चुनौती बनी हुई है। चिन्हित जिलों में Plasmodium falciparum संक्रमण के मामले भी सामने आए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मानसून के दौरान दोनों वेक्टर जनित बीमारियों पर एक साथ निगरानी जरूरी है।
प्रशासन की ओर से लोगों से घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील की गई है। साथ ही लगातार बुखार, बदन दर्द या अन्य लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी गई है।