‘भाषा का स्वराज’ 
कोलकाता सिटी

भाषाई स्वराज के लिए अपनी भाषा और संस्कृति का सम्मान जरूरी: प्रो. प्रेमशंकर त्रिपाठी

‘भाषा का स्वराज’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

Ravi

कोलकाता : मौलाना अबुल कलाम आजाद एशियाई अध्ययन संस्थान, कोलकाता एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘भाषा का स्वराज’ का बुधवार को समापन हुआ।

29 एवं 30 सितंबर को आयोजित संगोष्ठी में हिंदी की वैश्विक उपस्थिति, भाषाई स्वाधीनता, मातृभाषा, औपनिवेशिक विमर्श तथा भाषा-संस्कृति के संबंधों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।

उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के प्रभारी प्रो. अमित राय ने कहा कि मानसिक स्वराज की स्थापना के लिए अपनी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के साथ भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान आवश्यक है।

विधायक एवं अधिवक्ता तरुण ज्योति तिवारी ने न्याय व्यवस्था में हिंदी के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के उप निदेशक डॉ. विचित्रसेन गुप्ता ने कहा कि किसी भाषा की शक्ति उसके प्रयोग और व्यवहार से निर्धारित होती है। सत्र की अध्यक्षता प्रो. सरूप प्रसाद घोष ने की।

‘हिंदी की वैश्विक चेतना’ सत्र की अध्यक्षता प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के प्रो. वेद रमण ने की। वक्ताओं ने हिंदी को संस्कृति, पहचान, स्मृति और सामाजिक संवाद से जोड़ते हुए बहुभाषिक समाज में भाषाओं के बीच संवाद की आवश्यकता बताई।

दूसरे दिन ‘उपनिवेशवादी विमर्श में भाषाई स्वराज’ विषय पर चर्चा हुई। वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. प्रेमशंकर त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित सत्र में डॉ. वसुंधरा मिश्रा, डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी, डॉ. कमल कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने विचार रखे।

प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि सभी भाषाओं के प्रति सम्मान भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और यही भावना भाषाओं को व्यापक स्तर पर स्थापित कर सकती है।

इस अवसर पर निबंध लेखन प्रतियोगिता में बंगोवासी कॉलेज के नीलेश वर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता में प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय की प्रतीक्षा मुखर्जी प्रथम, बेथुन कॉलेज की संजना जायसवाल द्वितीय और सुमित्रा चौहान तृतीय रहीं।

समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. अमित राय ने की। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त आईपीएस गंगेश्वर सिंह एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. शंकर कुमार सान्याल ने भी संबोधित किया। अंत में प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

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