कोलकाता सिटी

रवींद्रभारती सोसाइटी ने मनाया 80वां स्थापना दिवस

जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी में हुआ भव्य आयोजन

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर के विचार, आदर्श और दर्शन को आधार बनाकर जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी परिसर में स्थापित रवींद्रभारती सोसाइटी ने अपने गौरवशाली सफर के 80 वर्ष पूरे कर लिए। 15 जनवरी 1947 को स्थापित इस प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था का 80वाँ स्थापना दिवस इस वर्ष रथीन्द्र मंच पर अत्यंत गरिमामय और भव्य रूप से मनाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत रवींद्रभारती सोसाइटी के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत उद्घाटन संगीत से हुई। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन तथा कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर एवं रथीन्द्रनाथ ठाकुर के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर स्थापना दिवस समारोह का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथियों के रूप में मंच पर उपस्थित थीं रवींद्रभारती विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर डॉ. सोनाली चक्रवर्ती बनर्जी, सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री माधबी मुखोपाध्याय तथा प्रतिष्ठित रवींद्रसंगीत गायिका एवं शिक्षिका प्रमिता मल्लिक। सोसाइटी की ओर से कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सुजीत कुमार बोस, उपाध्यक्ष अनिंद्य कुमार मित्र एवं न्यायमूर्ति सौमित्र पाल तथा महासचिव सिद्धार्थ मुखोपाध्याय मंचासीन रहे।

समारोह के दौरान गुणीजन सम्मान प्रदान कर माधबी मुखोपाध्याय और प्रमिता मल्लिक को सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण में महासचिव सिद्धार्थ मुखोपाध्याय ने संस्था की स्थापना से लेकर आज तक की सांस्कृतिक यात्रा, उपलब्धियों और सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके पश्चात मंचासीन विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

संक्षिप्त संबोधन में माधबी मुखोपाध्याय और प्रमिता मल्लिक ने इस सम्मान के प्रति अपनी प्रसन्नता और भावनात्मक अनुभव साझा किए। प्रमिता मल्लिक ने इस अवसर पर रवींद्रसंगीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस स्मरणीय दिन पर रवींद्रभारती सोसाइटी की साहित्यिक पत्रिका ‘साहित्य पत्र’ का एक विशेष अंक भी मंच से औपचारिक रूप से प्रकाशित किया गया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में “Tracing Tagore’s Legacy in America” (अमेरिका में विश्वकवि की विरासत की खोज) शीर्षक से एक विशेष वृत्तचित्र प्रदर्शित किया गया, जिसका निर्माण अमेरिका निवासी प्रसिद्ध वृत्तचित्र निर्माता डॉ. कल्लोल बोस ने किया है। इस वृत्तचित्र में कविगुरु की अमेरिका यात्रा, वहाँ से जुड़ी उनकी अनुभूतियाँ तथा विद्वान रवींद्र विशेषज्ञों के विश्लेषण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

समारोह का समापन सभी कलाकारों और उपस्थित जनों द्वारा सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाकर किया गया। पूरे कार्यक्रम का कुशल और सजीव संचालन श्री देवाशीष बोस ने किया।

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