कोलकाता : पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बक्खाली स्थित कारगिल बीच पर गंभीर रूप से संकटग्रस्त स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर को दोबारा देखे जाने से पक्षी प्रेमियों और संरक्षण विशेषज्ञों में उत्साह है।
रूस में टैग किए गए इस दुर्लभ प्रवासी पक्षी की पहचान उसके पैर में लगे लाइम-ग्रीन टैग से हुई। यह घटना बंगाल के समुद्र तटीय इलाकों के अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण होने का संकेत देती है।
पैर में लगे टैग से हुई पहचान
पक्षी के पैर में लगे हरे टैग पर दर्ज पहचान चिह्न से विशेषज्ञों को उसके पुराने रिकॉर्ड से जुड़ने में मदद मिली। इससे पता चला कि इस पक्षी को रूस के चुकोटका क्षेत्र के मेनिपिलगिनो में 6 जुलाई 2025 को जंगली अवस्था में चूजे के रूप में टैग किया गया था। पक्षी को दोबारा देखे जाने से उसके प्रवास और जीवित रहने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
बक्खाली के समुद्र तट पर पक्षी प्रेमियों की नजर
इस दुर्लभ पक्षी की तस्वीरें एक पक्षी प्रेमी ने खींची थीं। इससे पहले 29 मार्च 2026 को पटिबुनिया बीच पर भी पक्षी प्रेमियों और संरक्षण विशेषज्ञों ने एक स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर देखा था। हालांकि, उस पक्षी के पैर में कोई टैग नहीं था। बाद में टैग लगे दूसरे पक्षी की तस्वीर सामने आने पर विशेषज्ञों ने उसकी पहचान और यात्रा के रिकॉर्ड का मिलान किया।
विलुप्ति के खतरे से जूझ रही प्रजाति
स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर दुनिया के सबसे संकटग्रस्त प्रवासी तटीय पक्षियों में शामिल है। इसकी संख्या घटने के प्रमुख कारणों में समुद्र तटों और ज्वारीय दलदली क्षेत्रों का नष्ट होना, प्रवास के दौरान ठहरने वाले स्थानों में कमी तथा शिकार शामिल हैं।
यह प्रजाति प्रजनन के लिए रूस के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में जाती है और सर्दियों में दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के तटीय इलाकों की ओर प्रवास करती है। बंगाल में इस पक्षी की मौजूदगी दर्ज होना संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के लिए ऐसे रिकॉर्ड प्रवास मार्गों, ठहरने के स्थानों और प्रजाति के संरक्षण की जरूरतों को समझने में मददगार साबित होते हैं। समुद्र तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा इस दुर्लभ पक्षी के अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी है।