कोलकाता/जलपाईगुड़ी : बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्वास की योजना अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीमों ने सात रणनीतिक स्थानों पर मचान तैयार कर निगरानी शुरू कर दी है।
बारिश में कुछ कमी आने के बाद बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की कोशिश तेज की गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया से मिली जानकारी के अनुसार, टीमों ने बाघ को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर चारा भी रखा है।
वन विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, संबंधित बाघ ने पिछले चार-पांच दिनों में कोई शिकार नहीं किया है। ऐसे में उसके भोजन की तलाश में बाहर निकलने की संभावना को देखते हुए चारे का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालांकि, विभागीय अधिकारियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि पकड़े जाने वाला बाघ वही बाघिन है, जिसकी पहले पहचान की गई थी। लगातार बारिश के कारण अभियान में पिछले कुछ दिनों से बाधा आ रही थी।
बाघ को पकड़ने के बाद उसके परिवहन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार की जा रही है। प्रस्तावित योजना के तहत बाघ को विशेष एंबुलेंस से वाल्मीकि से गोरखपुर ले जाया जाएगा।
करीब 110 किलोमीटर से अधिक सड़क यात्रा के बाद भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से उसे उत्तर बंगाल के हसीमारा एयरबेस तक पहुंचाने की योजना है। इसके बाद सड़क मार्ग से बाघ को बक्सा टाइगर रिजर्व ले जाया जाएगा। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय से अनुमति के लिए बातचीत शुरू होने की जानकारी है।
बक्सा टाइगर रिजर्व ने पुनर्वास अभियान को देखते हुए 30 सितंबर से 3 अक्टूबर तक पर्यटन गतिविधियां स्थगित करने की सूचना जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, बाघ को 2 अक्टूबर को बक्सा में पुनर्वासित करने की तैयारी है। बारिश और वन क्षेत्र की परिस्थितियों को देखते हुए अंतिम अभियान की स्थिति मौके पर उपलब्ध परिस्थितियों के आधार पर तय होगी।