कोलकाता : उत्तर बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में वन विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को लाकर बक्सा में स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
इस अभियान में मदद के लिए सुंदरबन टाइगर रिजर्व की पांच सदस्यीय विशेषज्ञ टीम रविवार को बिहार रवाना हुई। यह अभियान देश में बाघों के पुनर्वास से जुड़े 13वें कार्यक्रम का हिस्सा बताया जा रहा है।
जीन्नत ऑपरेशन का अनुभव आएगा काम
सुंदरबन की टीम को बाघ पकड़ने का व्यावहारिक अनुभव है। इसी टीम ने दिसंबर 2024 में ओडिशा की बाघिन जीन्नत को पकड़ने के लिए जंगलमहल क्षेत्र में 21 दिनों तक अभियान चलाया था।
उस अभियान के दौरान जाल की मदद से बाघिन की गतिविधियों को सीमित क्षेत्र में नियंत्रित किया गया था। वाल्मीकि में होने वाले अभियान में भी टीम के इस अनुभव का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञ मिलकर करेंगे बाघिन का चयन
टीम में डिप्टी रेंजर मृत्युंजय बिस्वास और राजीब नस्कर, वनरक्षक पार्थ हलदर, अरण्यशक्ति कालीपद गायेन और पशु चिकित्सक शंकर बिस्वास शामिल हैं। वन विभाग के अनुसार अभियान की रणनीति टीम के बिहार पहुंचने के बाद तय होगी।
वन्यजीव विशेषज्ञों और बक्सा की टीम के साथ मिलकर उपयुक्त बाघिन का चयन किया जाएगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों ने वाल्मीकि में कुछ बाघिनों की पहचान पहले ही कर ली है।
NTCA की भी रहेगी निगरानी
बाघिन को पकड़ने और स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया में विशेषज्ञों की निगरानी रहेगी। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की तीन सदस्यीय टीम भी अभियान पर नजर रखेगी। यह टीम इस सप्ताह के अंत तक बक्सा का दौरा कर सकती है। वन विभाग का उद्देश्य बक्सा में बाघों की आबादी को फिर मजबूत करना और रिजर्व के पारिस्थितिक संतुलन को बेहतर बनाना है।