सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : “प्रभा जी ने सामाजिक चेतना को जागृत करने के उद्देश्य से फाउंडेशन की नींव रखी, जो निरंतर सार्थक और सक्रिय प्रयासों के साथ भारत की सांस्कृतिक पहचान एवं विरासत को सहेजने और संरक्षित करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। देश के विकास में संस्कृति और कला की विविध विधाओं को नए आयाम देने की दिशा में भी प्रभा खेतान फाउंडेशन का योगदान उल्लेखनीय है।”
यह बात केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कोलकाता में आयोजित प्रभा खेतान फाउंडेशन की पहल ‘एक मुलाकात’ के दौरान कही। उन्होंने फाउंडेशन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बहुत-से ऐसे कार्य हैं, जिन्हें सरकार नहीं कर सकती, लेकिन सामाजिक संस्थाएँ उन्हें प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाती हैं। इन्हीं संस्थाओं में प्रभा खेतान फाउंडेशन एक महत्वपूर्ण नाम है।
उन्होंने कहा कि प्रभा खेतान जी ने सामाजिक चेतना को जागृत करने के उद्देश्य से जिस संस्था की नींव रखी, वह आज भारत की सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर को निरंतर संजोने का सराहनीय कार्य कर रही है। फाउंडेशन साहित्य, कला, संगीत, लोक कला और कलाकारों के संरक्षण के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में भी निरंतर सक्रिय है।
शेखावत ने कहा कि कला के विविध रूप मनुष्य को संवेदनशील बनाते हैं। भारत आज जिस तरह विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसमें सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कला, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति ने न केवल समाज को संवेदनशील बनाने का कार्य किया है, बल्कि भारत की पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत को भारत बनाने में उसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की केंद्रीय भूमिका रही है। आज जब भारत विश्व में अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका की ओर आगे बढ़ रहा है, तब सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों का दायित्व भी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
उन्होंने कहा कि विश्व का नेतृत्व केवल आर्थिक, राजनीतिक, तकनीकी या सामरिक शक्ति के आधार पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आधार पर भी संभव है। भारत की विविधता, उसकी परंपराएँ, कला, संगीत, साहित्य और लोक संस्कृतियाँ उसकी महत्वपूर्ण शक्ति हैं।
उन्होंने फ्रांस के लूव्र संग्रहालय का उदाहरण देते हुए कहा कि यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध संग्रहालयों में से एक है। इसी तरह भारत भी नई दिल्ली में ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ के माध्यम से अपनी हजारों वर्षों की सभ्यतागत यात्रा को विश्व के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह संग्रहालय भारत की दस हजार वर्षों से अधिक की सभ्यतागत यात्रा को प्रस्तुत करेगा। यह केवल कलाकृतियों का संग्रह नहीं होगा, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा, ज्ञान, कला और जीवन-दृष्टि की निरंतर यात्रा को सामने रखने का प्रयास होगा।
शेखावत ने कहा कि योग हमेशा से भारत की परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन जब भारत के प्रधानमंत्री ने विश्व मंच से योग की बात रखी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उसे स्वीकार किया, तब योग को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिली। आज भारत की आवाज को दुनिया सुन रही है और स्वीकार कर रही है। वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक संपन्नता और सामर्थ्य को स्वीकार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज विदेशों की 60 से अधिक विश्वविद्यालयों में संस्कृत और 46 विश्वविद्यालयों में वेद पढ़ाए जा रहे हैं। यह भारत की उस ज्ञान-परंपरा की ओर संकेत करता है, जो सदियों से निरंतर चली आ रही है।
उन्होंने परिवार और गुरु-शिष्य परंपरा में आ रहे बदलावों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज परिवार नाम की संस्था का ह्रास हो रहा है और बुजुर्गों के प्रति सम्मान भी कम हुआ है। गुरु के स्थान पर मोबाइल फोन और यूट्यूब आ गए हैं, जिसके कारण गुरु के प्रति सम्मान की भावना भी प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि आज हमारे पास जो सांस्कृतिक थाती है, वह गुरु से गुरु तक चली आ रही निरंतर परंपरा के माध्यम से हम तक पहुँची है। आज दुनिया की नजर भारत की ओर है। ऐसे में यदि हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना है और परिवार तथा समाज में हो रही टूटन को बचाना है, तो यह अपनी संस्कृति के माध्यम से ही संभव है।
शेखावत ने कहा कि पुराने समय में राजा-महाराजा कलाकारों को संरक्षण प्रदान करते थे, ताकि वे पूरी तन्मयता के साथ अपना समय कला को समर्पित कर सकें। यदि ऐसा संरक्षण नहीं मिलता, तो कलाकार का अधिकांश समय जीवन और रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने में ही व्यतीत हो जाता।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद परिस्थितियाँ अलग थीं। उस समय देश के सामने प्राथमिक आवश्यकताएँ अधिक थीं और सरकार की प्राथमिकताएँ भी उसी अनुरूप थीं। लेकिन अब समय बदल चुका है। भारत की छवि विश्व पटल पर मजबूत हुई है और ऐसे में सांस्कृतिक क्षेत्र के विकास के लिए व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार सांस्कृतिक अवसंरचना का विकास कर सकती है, लेकिन उसे जीवंत और प्रभावी बनाने के लिए छोटे-बड़े, नए और वरिष्ठ कलाकारों तथा शिल्पकारों की सहभागिता आवश्यक होगी। सभी की सम्मिलित सहभागिता ही भारत को भारत बना सकती है, क्योंकि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता, कला, संस्कृति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में निहित है। इस विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी संदीप भूतोड़िया ने कहा कि फाउंडेशन साहित्य, कला, लोक कला, लोकभाषा के साथ-साथ कलाकारों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज इस कार्यक्रम के माध्यम से बंगाल के कलाकारों को केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ अंतरंग संवाद का अवसर मिला और उन्होंने अपनी बातों और अनुभवों को एक साथ आत्मीयता के साथ साझा किया। साथ ही, उन सभी ने देश के सांस्कृतिक विकास के प्रति अपनी आस्था और प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम में अहसास वूमेन की एशा दत्ता ने स्वागत वक्तव्य दिया। शैफाली रावत अगरवाल ने प्रभा खेतान फाउंडेशन के कार्यों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। इस विशेष अवसर पर अहसास वूमेन एवं ओडिसी नृत्यांगना डोना गांगुली तथा फाउंडेशन की कार्यकारी ट्रस्टी अनिन्दिता चटर्जी ने केंद्रीय मंत्री को उत्तरीय एवं स्मृति-चिह्न भेंट किया। कार्यक्रम के अंत में एशा दत्ता ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
सांस्कृतिक सम्मेलन में कला, साहित्य, सिनेमा, संगीत, रंगमंच, सामाजिक सेवा और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी अनेक विशिष्ट हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में प्रभा खेतान फाउंडेशन की कला एवं साहित्य के मानद सलाहकार ए. डी. चौधरी, प्रसिद्ध नृत्यांगना अलोकानंदा रॉय, गायक एवं संगीतकार अनुपम रॉय, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित फिल्म निर्देशक अरिंदम शील एवं कौशिक गांगुली, मानिकतल्ला चलताबागान दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष अशोक जायसवाल तथा उपाध्यक्ष राजेश बिहानी, ओडिसी नृत्यांगना अविरूप सेनगुप्ता, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित तालवादक विक्रम घोष, पत्रकार चंद्रिमा पाल, बाउल कलाकार दिब्येंदु दास बाउल, नृत्यांगना डोना गांगुली, सामाजिक कार्यकर्ता, फिल्म वितरक एवं प्रभा खेतान फाउंडेशन की कोलकाता की अहसास वूमेन एशा दत्ता, गायिका इमन चक्रवर्ती, फिल्म पत्रकार इंद्रनील रॉय, अभिनेत्री एवं सांसद जून मालिया, अभिनेत्री एवं पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी, कांथा कला विशेषज्ञ एवं अहसास वूमेन मलिका वर्मा, पद्मश्री से सम्मानित नृत्यांगना ममता शंकर, मणिपुरी नृत्य विशेषज्ञ प्रीति पटेल, पद्मश्री से सम्मानित बाउल कलाकार पं. पूर्ण दास बाउल, अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, कोलकाता के अमेरिकन सेंटर की डिप्टी पब्लिक अफेयर्स ऑफिसर एवं डिप्टी डायरेक्टर समिधा रेडकर, इंडियन म्यूजियम के निदेशक सायन भट्टाचार्य, ज्वेलरी डिज़ाइनर एवं अहसास वूमेन शेफाली रावत अग्रवाल, प्रसिद्ध कलाकार शिप्रा भट्टाचार्य, रंगमंच से जुड़े व्यक्तित्व सौमित्र मित्र, संगीतकार सौम्योजित, संगीतकार सौरेंद्रो, प्रसिद्ध चित्रकार-कलाकार सुभाप्रसन्न भट्टाचार्य, पद्मश्री से सम्मानित शास्त्रीय संगीत कलाकार तेजेंद्र नारायण मजूमदार तथा पद्मभूषण से सम्मानित गायिका उषा उथुप के अतिरिक्त ताज होटल्स के सीईओ पुनीत चटवाल और आईटीसी के महाप्रबंधक गौरव सुनेजा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
विभिन्न क्षेत्रों की इन प्रतिष्ठित हस्तियों की सहभागिता ने ‘एक मुलाकात’ को कला, संस्कृति, साहित्य और संवाद का एक समृद्ध मंच प्रदान किया।